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Champawat News: चंपावत में अब बच्चों का इलाज कराना हुआ मुश्किल

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चंपावत जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के इंतजार में बैठी महिलाएं। संवाद
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चंपावत। जिले के समूचे पहाड़ी हिस्सों में अब बच्चों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पाएगी। लोहाघाट उप जिला अस्पताल में पहले से ही बाल रोग विशेषज्ञ नहीं था और अब चंपावत जिला अस्पताल के विशेषज्ञ की भी सेवा सात दिसंबर को पूरी हो जाएगी। चंपावत के बाल रोग विशेषज्ञ दो दिन के अवकाश पर हैं, इस कारण बुधवार से जिला अस्पताल में बच्चों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टर न होने से यहां के लोगों को बच्चों के इलाज के लिए टनकपुर और हल्द्वानी जाने को मजबूर होना पड़ेगा।
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चंपावत जिले के 55 हजार से अधिक बच्चों के इलाज के लिए सिर्फ टनकपुर में एक बाल रोग विशेषज्ञ है। जिला अस्पताल में अनुबंधित चिकित्सक का सात दिसंबर को सेवाकाल पूरा हो रहा है। ऐसे में नई नियुक्ति नहीं होने तक अब पहाड़ी क्षेत्र में बच्चों के इलाज की दिक्कत बढ़ेगी।
कोट
चंपावत जिला अस्पताल के अनुबंधित चिकित्सक अभिमन्यु का सेवाकाल सात दिसंबर को पूरा हो रहा है। उनके अनुबंधित सेवा काल को विस्तारित करने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है।
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- डॉ. केेके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।

टनकपुर में शुरू हुआ हड्डी का इलाज
टनकपुर (चंपावत)। टनकपुर उप जिला अस्पताल में अब लंबे समय बाद हड्डी के रोगियों का इलाज शुरू हो सका है। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश जोगले ने यहां कार्यभार संभाल लिया है। बुधवार से उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है। पहले दिन 20 से अधिक लोगों का इलाज हुआ। अस्थिरोग विशेषज्ञ नहीं होने से यहां के लोगों को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, पीलीभीत और बरेली जिले के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती थी। डॉ. प्रकाश की तैनाती के बाद से लोगों को इस दिक्कत से निजात मिलेगी।
मैदानी क्षेत्र के विपरीत चंपावत जिले के दूसरे उप जिला अस्पताल लोहाघाट के लोगों की परेशानी जस की तस है। लोहाघाट में अस्थि रोग विशेषज्ञ नहीं होने से लोगों को चंपावत जिला अस्पताल आने को मजबूर होना पड़ता है। लोहाघाट के अलावा पाटी और बाराकोट क्षेत्र में भी कोई सुविधा नहीं है।
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