चंपावत का अधूरा पड़ा शहीद स्मारक।
- फोटो : अमर उजाला
कई युद्धों में वीरता की अद्भुत मिसाल पेश करने वाला चंपावत जिला एक अदद शहीद स्मारक को तरस रहा है। चार साल पूर्व सैनिक कल्याण विभाग परिसर में एक स्मारक के काम की शुरुआत हुई लेकिन धन की कमी से यह काम लंबे समय से लटका है। अब पूर्व सैनिक कल्याण अधिकारी ने खुद ही इस काम को आगे बढ़ाने की पहल की है। विभाग इसके लिए जन सहयोग लेगा।
उत्तराखंड राज्य बने 18 साल से अधिक हो गए हैं लेकिन इस जिले में शहीदों की स्मृतियों को संजोने के लिए एक भी स्मारक नहीं बन सका है। सैनिक कल्याण विभाग के मुताबिक आजादी के बाद से अब तक चंपावत जिले में कुल 72 शहीद हुए। इन तमाम शहीदों की स्मृति में सामूहिक रूप से एक शहीद स्मारक का निर्माण पांच वर्ष पूर्व सैनिक कल्याण विभाग परिसर में शुरू किया गया।
धन की कमी से स्मारक का काम बंद हो गया। सैनिक कल्याण विभाग का कहना है कि शहीद स्मारक में शहीदों के नामों के अंकन, प्लेटफार्म से लेकर फिनिशिंग का काम बचा हुआ है। अब जिला पूर्व सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल (रिटायर्ड) एमएस जोधा ने अपने स्तर से पहल शुरू की है। वे खुद पांच हजार रुपये की राशि देने के साथ विभागीय कर्मी-अधिकारियों के अलावा आम लोगों के सहयोग से इस शहीद स्मारक को पूरा कराएंगे।
हवाई रहा हरीश रावत का एलान
जनवरी 2016 में चंपावत के दौरे पर आए तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चंपावत के अधूरे पड़े शहीद स्मारक को पूरा करने के लिए चार लाख रुपये देने का एलान किया था लेकिन उनकी ये घोषणा अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
देश की सुरक्षा के लिए शहादत देने वाले शहीदों की याद को बनाए रखने के लिए शहीद स्मारक क्षेत्र की शान होती है लेकिन चंपावत में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए स्मारक नहीं है। अब वे खुद और विभागीय स्तर पर सहयोग के अलावा आम नागरिकों से सहयोग लेकर यहां के शहीद स्मारक के अधूरे काम को पूरा कराएंगे।
कर्नल (रिटायर्ड) एमएस जोधा जिला पूर्व सैनिक कल्याण अधिकारी, चंपावत।