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मरीज ही नहीं अस्पताल को भी इलाज का इंतजार

Sat, 04 Jul 2015 10:46 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, चंपावत
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जिले की स्वास्थ्य सेवा का बैरोमीटर है जिला अस्पताल। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र का मिजाज बिगड़ा हुआ है। छह करोड़ रुपये से अधिक की इस इमारत में इतनी क्षमता नहीं कि वह किसी गंभीर मरीज की जिंदगी बचा सके। सर्जन और निश्चेतक होने के बावजूद अभी तक एक भी आपरेशन नहीं किया जा सका है। यहां मरीज को ही नहीं अस्पताल को भी इलाज का इंतजार है। और ये हाल तब है, जब अस्पताल में संयुक्त निदेशक रैंक के छह डॉक्टर हैं।
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अक्तूबर 2012 से शुरू जिला अस्पताल की हकीकत जानने शनिवार को अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची, तो हालात वाकई चिंताजनक थे। मुड़ियानी की कलावती अपने पति जयदत्त के साथ अस्पताल पहुंची। इलाज के बाद उन्हें खुजली की मामूली दवा के लिए भी बाजार का रास्ता दिखा दिया गया। दंत चिकित्सक की कुर्सी भी खाली थी। दंत तकनीशियन मोहम्मद सलीम दांत के मरीजों का इलाज करते मिले। बताया गया कि दंत चिकित्सक शुक्रवार से अवकाश पर हैं। जिला अस्पताल के हाल इस कदर खराब हैं कि यहां 60 बैडों की क्षमता के बावजूद महज 20 बैड ही मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। 40 बैड अभी अस्पताल में लगे ही नहीं है। सबसे हैरतंगेज यह कि ढाई साल बाद भी अभी अस्पताल को पहले ऑपरेशन होने का इंतजार है। और तो और अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद परीक्षण नहीं हो पा रहे हैं। कुल मिलाकर जिले के सबसे बड़े अस्पताल के हाल यह कि मरीज प्राथमिक इलाज से अधिक की आस नहीं रखता। इस साल ही यहां से 55 मरीजों को रेफर किया गया है।
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