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थम नहीं रही हड़ताल, 11 दिन पूरे हुए

Sun, 10 Jan 2016 09:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में संचालित राजकीय अस्पताल में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की हड़ताल ग्यारहवें दिन भी जारी रही। हड़ताल के चलते यहां से अस्थि रोग विशेषज्ञ एवं बाल रोग विशेषज्ञ चले गए हैं। दो-दो माह तक वेतन नहीं मिलने से डॉक्टर बेहाल हैं। सबसे बड़ी मुश्किल अल्प वेतनभोगी कर्मियों के सामने पैदा हो गई है।
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कर्मियों का कहना है कि शील प्रबंधन द्वारा समय से वेतन एवं वेतन बढ़ोतरी न देना सरासर उत्पीड़न है। वैसे शील प्रबंधन द्वारा अस्पताल की व्यवस्थाओं को पटरी में लाने की प्रभावी पहल नहीं की गई। इसका असर यहां रोगियों की लगातार कम होती संख्या पर भी नजर आ रहा है। 2014 में पीपीपी मोड में जाने से पहले ओपीडी 75476 थी, जो पीपीपी मोड के बाद घटकर 53261 रह गई। पीपीपी मोड से पहले दो वर्षों में सरकारी व्यवस्था में 12115 रोगी भर्ती हुए थे। पीपीपी मोड में जाने के बाद ये संख्या घटकर 7929 रह गई। लापरवाही के चलते प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या भी कम हुई है। पहले दो वर्षों में जहां 2433 प्रसव किए गए थे, पीपीपी मोड में जाने के बाद यह संख्या घटकर 2136 हो गई।

एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ
अनुबंध के अनुसार अस्पताल में दो प्रसूति, ईएनटी, आर्थो, फिजिशियन, बाल रोग, डेंटल, निश्चेतक, रेडियोलॉजिस्ट, जनरल सर्जन समेत दो ईएमओ को लगाकर 12 चिकित्सक नियुक्त किए जाने चाहिए थे, लेकिन यहां रेडियोलॉजिस्ट, फिजीशियन, निश्चेतक डॉक्टर अक्सर गायब रहे। प्रबंधन द्वारा यहां सर्जन की तैनाती का दावा किया गया है, लेकिन पीपीपी मोड में जाने के बाद यहां अब तक कोई भी ऑपरेशन नहीं किया गया है।
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स्वास्थ्य महानिदेशक के पत्र से ज्ञात हुआ है कि अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टरों का नवंबर का 24.87 लाख रुपये का भुगतान 21 दिसंबर को शासन ने शील प्रबंधन को कर दिया गया है। अब तक यह वेतन क्यों नहीं बांटा गया, इसके बारे में प्रबंधन से संपर्क किया जा रहा है। -डा.मंजीत सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक, पीपीपी अस्पताल।

डॉक्टर और कर्मचारियों को वेतन दिलाने के लिए लगातार स्वास्थ्य महानिदेशक से बात हो रही है। ताजा जानकारी के अनुसार शासन स्तर से नवंबर के वेतन का भुगतान प्रबंधन को किया जा चुका है। प्रबंधन को शीघ्र वेतन बांटने के लिए पुन: पहल की जा रही है। -डा.विनोद टोलिया, मुख्य चिकित्साधिकारी
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