छात्र नहीं होने से बंद डुंगरासेठी का राजकीय प्राथमिक विद्यालय।
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स्कूल चलो अभियान का नारा दूरदराज ही नहीं, शहरी क्षेत्रों में भी हांफ रहा है। और तो और अब यह नौबत कलक्ट्रेट के एकदम नजदीक के स्कूल में भी आ गई है। कलक्ट्रेट से महज पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थित डुंगरासेठी राजकीय प्राथमिक विद्यालय में अब फिलहाल शिक्षा का उजाला नहीं होगा। छात्र संख्या शून्य होने के कारण इस स्कूल में ताला लटक गया है।
डुंगरासेठी राजकीय प्राथमिक विद्यालय में एक दशक पूर्व तक 55 छात्र-छात्राएं थेे, मगर अब यह स्कूल पढ़ने वालों के अभाव में बंद हो गया है। स्कूल में एक भी छात्र के नहीं होने से बृहस्पतिवार से इसे बंद कर दिया गया है। और यहां के प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज जोशी को राजकीय प्राथमिक विद्यालय ललुवापानी भेज दिया गया है। इस संबंध में उप शिक्षाधिकारी अंशुल बिष्ट ने पत्र जारी किया है। विभाग के अनुसार यहां की भोजन माता को भी दूसरी जगह भेजा जा रहा है।
कोट
डुंरासेठी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में मात्र दो छात्र थे। इन छात्रों द्वारा इस शिक्षा सत्र में कुलेठी के स्कूल में प्रवेश लेने से यहां एक भी छात्र नहीं रह गया था। नए छात्रों को डुंगरासेठी के स्कूल में दाखिला लेने के लिए विभाग प्रेरित करेगा। अंशुल बिष्ट, उप शिक्षाधिकारी, चंपावत।
दूसरे स्कूलों में शिफ्ट हो चुके हैं 8 स्कूल
चंपावत जिले में आठ राजकीय प्राथमिक विद्यालय और एक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय दो अप्रैल से शुरू नए शिक्षा सत्र में पास के दूसरे विद्यालयों से संचालित हो रहे हैं। दस से कम छात्र संख्या के साथ एक किलोमीटर के भीतर दूसरे विद्यालय होने के चलते चमरौली, छंदा, करौली, मड़ियोली, ब्रुशखोला, सिरतोली, पिपलाटी प्राइमरी और तपनीपाल राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को एक किमी के दायरे में आने वाले दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया है।
शिक्षा मित्र के आसरे उदाली का प्राथमिक विद्यालय
राजकीय प्राथमिक विद्यालय उदाली में स्थायी शिक्षक के अक्सर गैर हाजिर रहने के आरोप लगे हैं। इस संबंध में ग्राम प्रधान पूजा और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों ने शिक्षा विभाग से शिकायत की है। आरोप लगाया है कि स्थायी शिक्षक के अक्सर छुट्टी में रहने से पढ़ाई की जिम्मेदारी एकमात्र शिक्षा मित्र के हवाले रहती है। नतीजा यह हो रहा है कि यहां छात्र संख्या भी घटती जा रही है। इस समय यहा महज छह छात्र पढ़ रहे हैं। साथ ही पिछले शिक्षा सत्र के गणवेश भी बच्चों को नहीं मिलने के आरोप लगाए गए हैं। उप शिक्षाधिकारी अंशुल बिष्ट ने शिकायतों की जांच कराने की बात कही है।