सरकारी भूमि की खरीद-फरोख्त का मामला दो विभागों के बीच उलझ गया है। यूपी सिंचाई विभाग के शारदा हेडवर्क्स ने उक्त भूमि को वन विभाग की बताया है तो वन विभाग उस भूमि को यूपी सिंचाई विभाग के अधिकार वाली बता रहा है। बहरहाल सरकारी भूमि की खरीद-फरोख्त की किसी को चिंता नहीं। न ही इस बात की चिंता ही है कि वह भूमि 88 वर्षों से सरकारी नाले में दर्ज है। नाला बंद होने से क्षेत्रवासियों को बरसात में बाढ़ का दंश झेलना पड़ेगा।
15 जून को पंपापुर में नाले वाली भूमि पर जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर समतलीकरण किया गया था। करीब सवा एकड़ भूमि में से तीन बीघा सरकारी भूमि को ढाई लाख रुपये बीघा की दर से बेचा गया है। उक्त भूमि को शारदा हेडवर्क्स के जिलेदार परमानंद पंत ने वन विभाग की होना बताया है। इस बाबत पूर्वी तराई वन प्रभाग खटीमा के आईएफएस (ट्रेनी डीएफओ) अमित कुंवर ने बताया कि फारेस्टर ने उक्त भूमि को शारदा हेडवर्क्स के अधिकार वाली बताया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही दोनों विभागों के नक्शों का मिलान कर भूमि का ज्वाइंट सर्वे किया जाएगा। कहा कि वन विभाग अपनी भूमि पर अतिक्रमण के सख्त खिलाफ है।
सरकारी भूमि की खरीद-फरोख्त और कब्जा किया जाना जुर्म है। यूपी सिंचाई विभाग के शारदा हेडवर्क्स और वन विभाग को भूमि की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही राजस्व, वन विभाग और शारदा हेडवर्क्स मौके पर जाकर संयुक्त जांच करेगा। भूमि जिस विभाग की होगी उसे कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे। -नरेश चंद्र दुर्गापाल, एसडीएम, टनकपुर।