भालू के हमले में जख्मी प्रीतम राम।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे लोहाघाट ब्लाक के रौसाल गांव के प्रीतम राम को डेढ़ साल बाद भी भालू से हुए हमले की मुआवजे की रकम नहीं मिल सकी है। दिव्यांग प्रीतम और उनके परिजन इस राशि को पाने के लिए पांच बार वन विभाग से लेकर कलक्ट्रेट तक गुहार लगा चुके हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। अलबत्ता बुधवार को पीड़ित के बेटे ने नवागत डीएफओ के सम्मुख दस्तक दी।
रौसाल के प्रीतम राम 16 जनवरी 2019 को बेटे को बचाने के प्रयास में भालू के हमले में बुरी तरह जख्मी हो गए थे। लहूलुहान हाल में उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। उनके बेटे जगदीश कुमार बताते हैं कि आंख से दिव्यांग पिता के इलाज के लिए लोहाघाट से हल्द्वानी, भोजीपुरा होते हुए दिल्ली के एम्स तक की दौड़ लगी। इस पूरी कवायद में करीब आठ लाख रुपये का खर्च आया, जिसमें स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी सहयोग किया।
प्रीतम के ठीक होने के बाद परिजनों ने मुआवजे के लिए वन विभाग और प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। लेकिन डेढ़ साल से अधिक बीतने के बाद भी क्षतिपूर्ति की रकम (एक लाख रुपये) नहीं मिली। थकहार कर मंगलवार को जगदीश कुमार ने एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता रितिक भंडारी के सहयोग से नवागत डीएफओ के सम्मुख पूरा प्रकरण रखा। डीएफओ मयंक शेखर झा ने विभागीय पटल से जानकारी लेने के बाद 31 जुलाई तक हमले के जख्मी व्यक्ति के बैंक खाते में मुआवजे की राशि स्थानांतरित करने के मातहतों को आदेश दिए।
लटके हैं 129 प्रकरण
चंपावत। विभिन्न वन्य जीवों के हमलों से संबंधित 129 मामले चंपावत वन प्रभाग के अंतर्गत लटके हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक पिछले साल तक 129 प्रकरण में 13 लाख चार हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दी जानी बाकी है। वैसे 2011-12 से अब तक हमले के कुल 896 घटनाओं में से 763 निस्तारित हो चुकी है। इसमें 62.98 लाख रुपये पीड़ित या उनके परिजनों को दिए जा चुके हैं।