पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ डिपो की नौ बसें इंजन में खराबी के चलते टनकपुर वर्कशॉप में खड़ीं हैं। एक महीने बाद भी इनकी खराबी दूर नहीं हो सकी है।
पिथौरागढ़ डिपो के पास 58 बसें हैं। वर्ष 2019 के बाद डिपो को नई बसें नहीं मिलीं हैं। ऐसे में पुरानी बसों को सड़कों पर दौड़ाना निगम की मजबूरी है। हालात यह है कि इसमें से भी डिपो की 25 बसें अपनी उम्र पार कर चुकीं है। नौ बसें इंजन में खराबी के चलते टनकपुर वर्कशॉप में खड़ीं हैं। पिथौरागढ़ डिपो को अक्तूबर महीने के पहले सप्ताह में नई बसें मिलने का दावा किया था। डिपो के मुताबिक निगम से 25 नई बस मिलनी थीं। हैरानी है कि अब तक एक भी नई बस पिथौरागढ़ नहीं पहुंच सकी है।
कम बसें चलने से लोग टैक्सी में यात्रा करने को मजबूर
पिथौरागढ़। पहाड़ के अधिकतर लोग रोडवेज बसों में ही सफर करना पसंद करते हैं। सरकार की अनदेखी ने रोडवेज सेवा को लाचार बना दिया है। खराब बसों में जान जोखिम में डालकर यात्रा करवाई जा रही है। बसों के कम संचालन से यात्री मजबूरन टैक्सियों में यात्रा करने को मजबूर हैं। इससे यात्रियों को अधिक किराया देना पड़ रहा है।
इनसेट कोट-
पंजीकरण का कार्य चल रहा है। जैसी ही यह प्रकिया पूरी होती है। उम्मीद है पिथौरागढ़ डिपो को जल्द नई बसें मिलेंगी। - रवि शेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़ डिपो