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उपेक्षित हाल में हैं जिम एडवर्ड कार्बेट से जुड़े स्थल

Fri, 24 Nov 2017 10:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
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चूका टाक के जंगल में इसी पत्थर पर बैठकर जिम कार्बेट ने नरभक्षी बाघिन को किया था ढेर। - फोटो : अमर उजाला
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 मशहूर शिकारी और शिकार कथाओं के लेखक जिम एडवर्ड कार्बेट ने अतीत में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में कई नरभक्षी बाघों का शिकार कर लोगों को राहत दिलाई थी। आज भी जिले के सीमांत क्षेत्र के टाक, चूका, सीम और लधियाघाटी क्षेत्र के गांवों में जिम कार्बेट को बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है। लेकिन जिले में जिम कार्बेट की शिकार कथाओं से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थल वर्तमान में उपेक्षित हाल में है। 
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जिम कार्बेट ने 30 नवंबर 1938 को कुमाऊं की नरभक्षी के नाम से प्रसिद्ध बाघिन का शिकार चूका टाक के जंगल में किया था।  इस बाघिन के नाम उस समय 436 लोगों को मौत के घाट उतारने का रिकार्ड था। जंगल में जिम कार्बेट ने जिस पत्थर पर बैठकर बाघिन को ढेर किया था, वह पत्थर ऐतिहासिक धरोहर होने के बावजूद वर्तमान में झाड़ झंखाड़ से घिरा हुआ है। वन विभाग की ओर से इस स्थल पर एक प्रतीक स्तंभ अवश्य लगाया है। लेकिन यह प्रतीक स्तंभ भी मौसम की मार के कारण दिन ब दिन फीका होता जा रहा है। इसके अलावा कलढूंगा में वन विभाग का विश्रामगृह जहां जिम कार्बेट ने कई बार प्रवास किया था, वर्तमान में उपेक्षित हाल में है।


नहीं बन सका कार्बेट से जुड़ी वस्तुओं का संग्रहालय
चंपावत। वन विभाग की ओर से पूर्व में जिम कार्बेट से जुड़ी वस्तुओं को सहेजकर एक संग्रहालय बनाए जाने की कार्ययोजना तैयार की गई थी। जिसके तहत सीमांत मंच में स्थित वन विभाग के डाक बंगले को म्यूजियम का रूप दिया जाना था। लेकिन कार्ययोजना को आज तक शासन की अनुमति नहीं मिल सकी है। प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट के अनुसार इस संबंध में शासन की ओर से अब तक कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
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जनप्रतिनिधियों ने उठाई ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण की मांग
चंपावत। पूर्णागिरि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने जिम कार्बेट से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की मांग उठाई है। पूर्णागिरि मंदिर कमेटी अध्यक्ष और बीडीसी सदस्य भुवन पांडेय, नेत्रबल्लभ तिवारी, किशन तिवारी, ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी, ललित कुमार, भुवन चंद्र आदि का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए जिम कार्बेट से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण किया जाए।
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