जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर स्थित सीमांत मंच क्षेत्र में पहली बार कुदरती रूप से खूबसूरत और पर्याप्त पानी से भरे पूरे झरने की खोज की गई है। सीमावर्ती गांव दुबड़ जैनल के रहने वाले युवा राहुल सिंह महर ने बीहड़ वनों और चट्टानों से रास्ता बनाते हुए अपनी जान जोखिम में डालते हुए इस झरने की खोज की है। जिसे उन्होंने छलगाड़ा नाम दिया है। करीब डेढ़ किमी से अधिक की उंचाई से गिरने वाले छलगाड़ा झरने से बने तालाब में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध है। सीमांत मंच कस्बे से करीब सात किमी की दूरी में स्थित इस झरने तक पहुंचने के लिए पहली बार युवा राहुल ने पहल की और पहली बार वह अब तक अज्ञात और अनछुए झरने के बारे में लोगों को जानकारी मिली है।
राहुल सिंह का कहना है कि गांव के बुजुर्गों की ओर से बीहड़ जंगल और चट्टानों के बीच एक खूबसूरत झरने के होने की बातें सुनी थी। जिस पर उन्होंने एक मजदूर को साथ लेकर कौतूहल का विषय बने झरने की खोजबीन का बीड़ा उठाया। करीब सात किमी की दूरी पर बीहड़ वन के बीच उन्होंने झरने को खोज निकाला है। राहुल का कहना है कि जहां जिले के सीमावर्ती गांवों में इन दिनों गंभीर पेयजल संकट चल रहा है, वहीं इस झरने में इतना पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध है कि सीमावर्ती गांवों के साथ ही चंपावत नगर के लिए भी पेयजल योजना बनाई जा सकती है। उनका कहना है कि यह स्थल इतना खूबसूरत है कि यहां तक सड़क अथवा पैदल मार्ग बनाकर पर्यटकों को इस ओर आकर्षित किया जा सकता है। इस मामले में जिला पर्यटन विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी का कहना है कि राहुल सिंह और अन्य ग्रामीणों ने इस संबंध में उन्हें जानकारी दी है। उनका कहना है कि जल्द इस स्थल तक ट्रेकिंग दल को भेजा जाएगा, यदि जगह उपयुक्त पाई गई तो यहां साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है स्थल
चंपावत। सीमांत क्षेत्र में अब तक अदृश्य हाल में रहे झरने के अस्तित्व में आने के बाद इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग जोर पकड़ रही है। सामाजिक कार्यकर्ता शेर सिंह महर ने इस संबंध में प्रदेश के पर्यटन विकास मंत्री सतपाल महराज को ज्ञापन भेजा है।
साहसिक पर्यटन का प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाए
चंपावत। क्षेत्र के युवा जगदीश सिंह का कहना है कि छलगाड़ा झरने और इसके आसपास के स्थलों में कुदरत ने अपना सौंदर्य दोनों हाथों से लुटाया है। ऐसे में पर्यटन विकास विभाग को यहां पर साहसिक पर्यटन का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर युवाओं को प्रशिक्षित करना चाहिए।
पर्यटन मानचित्र में शामिल करें छलगाड़ा झरना
चंपावत। सीमांत क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि नए खोजे गए छलगाड़ा झरने को पर्यटन मानचित्र में शामिल किया जाना चाहिए। ग्रामीण राम सिंह का कहना है कि इलाके के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थलों के साथ छलगाड़ा झरने के बीच पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है।