भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से हमारी सांस्कृतिक विविधताएं विषय पर मैसूर में 18 से 29 जनवरी तक हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में उत्तराखंड का बोलबाला रहा। मैसूर कर्नाटक में जागर, खड़ी होली, नंदा राजजात यात्रा के प्रदर्शन से लोगों को रूबरू कराया गया।
जीआईसी चौमेल के प्रवक्ता पीसी तिवारी के नेतृत्व में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के 13 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपने प्रदर्शनों के जरिए उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, गोलज्यू और मां भगवती के जागर की परंपरा को जीवंत स्वरूप दिया। खड़ी होली में झनकारो झनकारो झनकारो, गोरी प्यारो लगे तेरो झनकारो बोल पर खड़ी होली का गायन किया गया। इस दौरान तिवारी ने उत्तराखंड के आध्यात्मिक और दर्शनीय स्थलों की जानकारी देते हुए लोगों को उत्तराखंड आने के लिए भी आमंत्रित किया। इस कार्यक्रम में सीएस भट्ट, सीएस पुजारी, नवीन पांडेय, प्रेमपाल गंगवार, पूरन उपाध्याय, रजनी, रीता रानी, कुसुम चौधरी, हेम पाठक, हेम लोहुमी, सीएस रतूड़ी शामिल थे।
क्यों कहा जाता है देवभूमि
प्रवक्ता श्री तिवारी ने कार्यशाला में जप, तप, व्रत, हवन, यज्ञ, सेवा, संस्कार, शृंगार, श्राद्ध, तर्पण, अर्पण की गौरवशाली परंपरा को लोगों के सम्मुख रखते हुए कहा कि महान ऋषि मुनियों, मनिषियों ने आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक शांति प्राप्त की। यही नहीं रावण वध के बाद युद्ध में बहुत सारे लोगों को मारने पर स्वयं प्रभु राम आत्मिक शांति के लिए यहां आए थे।