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नरियालगांव परियोजना सुधारेगी बद्री गायों की नस्ल

Sat, 15 Apr 2017 10:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
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चंपावत में स्थानीय बद्री प्रजाति की गाय। - फोटो : अमर उजाला
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पशुपालन विभाग के नरियालगांव परियोजना अनुसंधान केंद्र में स्थानीय नस्ल की बद्री (कठवा) गायों की नस्ल सुधारने की कवायद शुरू हो गई है। इससे अब तक मंहगी नस्ल की गायों के स्थान पर कम दूध देने वाली कठवा गायों को पालने वाले पशुपालकों को भी लाभ मिलने लगेगा। केंद्र में शोध कार्य के लिए स्थानीय गायों की परीक्षण के बाद खरीद की जाएगी।

परियोजना केंद्र के प्रभारी डा.एचसी जोशी ने बताया कि अनुसंधान केंद्र में शोध कार्य के लिए 50 बद्री गायें क्रय किए जाने की योजना है। उन्होंने कहा कि जिले के किसानों से पहाड़ी नस्ल की बद्री गायें जो कि सभी मानक पूरे करती हैं, क्रय की जाएंगी।
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इसके लिए गाय के कूबड़, रंग के अलावा पहली और दूसरी दूसरे बार प्रजनन तथा दूध के उत्पादन के रिकार्ड को आधार बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी मानकों को पूरे करने वाली बद्री गाय पालने वाले अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में सूचना देकर गायों का परीक्षण करा सकते हैं।

गौरतलब है कि जिले में अधिकांश गरीब पशुपालक जर्सी अथवा अन्य संकर नस्ल की गायों के स्थान पर बद्री गायों को पालते हैं। भले ही यह बद्री गायें जर्सी या अन्य नस्ल की गायों की अपेक्षा कम दूध देती हैं, लेकिन इनके रखरखाव में जर्सी गायों की तुलना में कम खर्च आता है। यदि नरियालगांव प्रोजेक्ट में बद्री गायों की नस्ल सुधारने के साथ ही उनके दूध में बढ़ोतरी का प्रयास सफल रहता है तो इससे गरीब पशुपालकों को खासा लाभ पहुंच सकता है।
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वर्तमान में 113 गायों पर चल रहा है शोध
नरियालगांव परियोजना के प्रभारी डा.एचसी जोशी ने बताया कि वर्तमान में केंद्र में 113 बद्री गायों में शोध कार्य किया जा रहा है। इसमें अधिकांश गायें गाभिन होने के साथ ही अन्य गायें दूध का उत्पादन कर रही हैं। बताते चलें कि पूर्व में नरियालगांव प्रोजेक्ट को ऋषिकेश के पशुलोक की तर्ज पर विकसित किए जाने की योजना थी, लेकिन लंबे समय तक कार्य शुरू नहीं होने के कारण बाद में इस केंद्र को गदर्भ अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया था। विभाग को इसमें कामयाबी नहीं मिलने पर बीते तीन वर्षों से यहां बद्री गायों पर शोध किया जा रहा है।
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