चंपावत। बालेश्वर महादेव मंदिर में नंदाष्टमी महोत्सव में श्रद्धालुओं ने सुरक्षित दूरी का पालन कर पूजा-अर्चना की। मंगलवार सुबह साढ़े पांच बजे श्रद्धालु कदली वृक्ष लाने बालेश्वर मंदिर से रौरुयूड़ा के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान श्रद्धालु मां नंदा सुनंदा के जयकारे लगाते चल रहे थे।
यात्रा तल्लीहाट, मल्लीहाट, नागनाथ मंदिर और राजबुंगा का किला होकर रौरुयूड़ा पहुंची। श्रद्धालु कदली वृक्ष को बालेश्वर मंदिर लाए। कदली वृक्ष के साथ मंदिर की परिक्रमा के बाद श्रद्धालुओं ने बालेश्वर नौले में स्नान किया। इसके बाद कदली वृक्ष से प्रतिमाओं का निर्माण किया गया। पुरोहित गिरीश कलौनी, दीपक कुलेठा, विनोद पांडेय ने विधि-विधान के साथ प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की। यजमान देवीलाल वर्मा, एनडी गड़कोटी, प्रकाश पांडेय, पवन गिरि, मोहिनी साह आदि ने शिव पूजन और नंदा-सुनंदा का विशेष पूजन किया। महोत्सव समिति के अध्यक्ष शंकर पांडेय और सचिव विकास साह ने बताया कि बुधवार को हवन यज्ञ के साथ महोत्सव का समापन होगा।
सादगी के साथ हो रहा गौरा पर्व
चंपावत/लोहाघाट। जिले के नगर, गांवों में गौरा पर्व सुरक्षित दूरी के साथ मनाया जा रहा है। मांदली देवल के ज्वाला मंदिर में श्रद्धालुओं ने गौरा-महेश की मूर्ति का पूजन किया। पूजा-अर्चना में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमा पांडेय, भगवती पांडेय, भावना पांडेय, उमा पांडेय, हेमा, जयंती पांडेय, तारा, जया तिवारी, बीना, पुष्पा उप्रेती, सरिता, मीनाक्षी, हेमा, बसंती पंत, देवकी देवी आदि थे। नेपाल सीमा से लगे लोहाघाट ब्लॉक के सुनकुरी, लेटी, जमरसों, सुंई आदि स्थानों में गौरा महोत्सव शुरू हो गया है। पूजा, हेमा, मंजू, राशी, चंचला, गीता, भावना, रेखा, सुनीता, बबीता आदि महिलाओं का कहना है कि कोरोना के चलते इस साल गौरा महोत्सव सादगी के साथ मनाया जा रहा है। पिछले साल तक होने वाला गौशरा, चांचरी, धुमारी आदि का गायन इस बार नहीं हुआ।