महाकाली के तट में स्थित नगरूघाट का मेला परंपरागत उल्लास, रंगारंग कार्यक्रमों और पर्व स्नान के साथ संपन्न हो गया। मेले में भारत-नेपाल के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और कार्तिक पूर्णिमा की पहली सूरज की किरण से पूर्व पर्व स्नान कर भगवान नागार्जुन के दर्शन किए।
मंगलवार रात को सल्टा, बगोटी, जमरसों से जहां देवरथ पहुंचे, वहीं सुनकुरी, लेटी, पासम, मजपीपल गांवों से शोभायात्राएं निकली, जिसमें देवडांगरों को लोग कंधों में विराजमान कर ले गए। रात यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख योगेश मेहता और बाराही मंदिर कमेटी के संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने किया। जिला पंचायत अध्यक्ष ने सूंगरखाल से नगरूघाट तक चार लाख रुपये से डेढ़ किमी सीसी मार्ग बनाने की घोषणा की।
ब्लॉक प्रमुख ने मंदिर के जीर्णोद्धार में सहयोग की बात कही। भारत सहित नेपाल के कुसमौद, डिम्मर, मटियानी, अमराड़, वासको, वछाला, संतोला, बंडा आदि गांवों के तमाम लोग मेले में शामिल हुए। आयोजन समिति की ओर से बहादुर चंद, डा.सतीश पांडेय, विक्रम सामंत, अनिल पांडेय, देव सिंह आदि ने सभी का स्वागत किया।
मेले में नहीं दिखा मधेसी आंदोलन का प्रभाव
मेले में भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी के रिश्तों की मधुर मिठास परंपरागत रूप से देखने को मिली। मेले के आयोजन में दोनों देशों के लोग सहयोग कर रहे थे। मेले में मधेसी आंदोलन का कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला।