चंपावत का नागनाथ मंदिर उपेक्षित
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चंपावत। चंपानगरी नामल विख्यात चंपावत बाजारक् की ठीक बीच्चोंबीच में बणियोक् ऐतिहासिक नागनाथ ज्यूक् मंदिर उपेक्षा का शिकार बणी रौ। देखरेखक् अभाव में मंदिर में बणियाक् धर्मशाला लगै खंनोर है गै छीन। ये मंदिरक् खन चंद राजवंशक् राजा कीर्ति चंद पुत्र रतन चंद लै करीब 15वीं सदी में बनायक् छ।
नागनाथक् मंदिरक् बार में कई जां कि पड़ोसी देश नेपालक् डोटी के मल्ल राजा लै यांक् सत्तारूढ़ चंद राजा कीतचंदक् के खिलाफ लड़ाई करी दी। तब एक सन्यासी नागनाथ बाबा लै कीर्ति चंद खन लड़ाई जितनोंक् उपाय बता। जैके बाद कीर्तिचंद लै डोटीक् राजा कै लड़ाई में हरा दियो। ये लड़ाईक् बाद कीतचंद बाबा नागनाथक् चेल बनीग्यो।
उलै बाबाक् मरणक् बाद राजबुंगाक् किले बगल में उनूकि समाधि बना और एक शिव मंदिर का निर्माण कराछ। इतिहास जांणया देवेंद्र ओली ज्यू को कूंन छ कि पुरान टैम में नागनाथ मंदिर म जन अदालत लागछीन।
जै में कई गरीब गुरबों को न्याय मिलछ्यो। अचाल्यौ पुरात्व विभाग लै ये ऐतिहासिक धरोहर खन अपन हाल में छोड़ राखौ। रौल्यूड़ा के नाथजी परिवारक् अलावा आसपास के आदिमी मंदिर की देखरेख करन्यान।
चंपावत। नागनाथक् मंदिरक् बगल में चंद राजओंक् बनाइना राजबुंगाक् किल छ। राजबुंगाक् किल भीतर अचाल्यौ कई कार्यालय चलनैन। किल भीतर वर्तमान में चंपावत तहसील, एसडीएम सदर और जिला आबकारी विभाग वालानक् औफिस छन।