चंपावत। एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आईसीडीपी) के तहत साधन सहकारी समिति सिप्टी में पहली बार मशरूम का उत्पादन शुरू हो गया है। सहकारिता विभाग की ओर से परियोजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देने के बाद बृहस्पतिवार से सफलतापूर्वक मशरूम का उत्पादन शुरू कर दिया है।
पुनाबे में स्थित मशरूम उत्पादन केंद्र में एक समय में मशरूम के पांच सौ बैग उत्पादित किए जा सकेंगे। शुभारंभ के पहले दिन में समिति की ओर से 60 बैग तैयार कर करीब 30 किग्रा मशरूम उत्पादित किया है। सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक पीएस राणा के अनुसार सिप्टी साधन सहकारी समिति की ओर से मशरूम की ढिंगरी (ओएस्टर) प्रजाति का उत्पादन शुरू कर दिया है, जो स्वादिष्ट और सेहत के लिए लाभदायक है।
शुरुआत में कम मात्रा में मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है लेकिन डिमांड बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर मशरूम की बिक्री के बाद बचे मशरूम को देहरादून भेजा जाएगा। सहायक निबंधक के अनुसार साधन सहकारी समिति सिप्टी ने अपने ही भवन में मशरूम उत्पादन केंद्र खोला है।
इससे समिति की आय में भी बढ़ोतरी होगी। समिति सचिव हरीश जोशी, देवेंद्र मेवाड़ी का कहना है कि समिति की ओर से अन्य स्वयं सहायता समूहों, किसानों को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए मशरूम उत्पादन से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा।
चंपावत। मशरूम में कई ऐसे जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिनकी शरीर को बहुत जरूरत होती है। वर्तमान में मशरूम दो सौ रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रहा है। वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. बीपी ओली का कहना है कि मशरूम फाइबर का भी स्रोत है। कई बीमारियों में मशरूम का इस्तेमाल दवाई के तौर पर किया जाता है। कोलेस्ट्राल कम होने के कारण इसके सेवन से लंबे वक्त तक भूख नहीं लगती है।
चंपावत। मशरूम उत्पादन केंद्र के प्रभारी देवेंद्र सिंह करायत के अनुसार मशरूम में कई महत्वपूर्ण खनिज, विटामिन पाए जाते हैं। इसमें विटामिन बी, डी, पोटेशियम, कॉपर, आयरन, सेलेनियम की भरपूर मात्रा होती है। मशरूम में कोलाइन नाम का एक खास पोषक तत्व पाया जाता है जो मांसपेशियों की सक्रियता और याददाश्त बरकरार रखने में मददगार है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट होने के साथ ही यह वजन घटाने में भी मददगार होता है।