लोहाघाट (चंपावत)। उत्तराखंड रोडवेज के लोहाघाट डिपो में तीन माह से फोरमैन का पद रिक्त होने से हो रही परेशानी से नाराज चालक-परिचालकों ने विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया। रोडवेज कार्यशाला में नारेबाजी कर शीघ्र डिपो में फोरमैन की तैनाती की मांग की गई। प्रदर्शन के चलते करीब दो घंटे तक लोहाघाट डिपो से बसों का संचालन ठप रहा। सहायक मंडलीय प्रबंधक (एजीएम) द्वारा प्रदर्शनकारियों से वार्ता करने के बाद बसों का संचालन शुरू हुआ।
बुधवार को रोडवेज कर्मचारी यूनियन के महामंत्री मनोज मिश्रा के नेतृत्व में फोरमैन की तैनाती की मांग को लेकर छमनियां स्थित रोडवेज कार्यशाला में नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया गया। उनका कहना था कि फोरमैन नहीं होने से न तो कार्यशाला में बसों की कायदे से मरम्मत हो रही है, और नहीं पर्याप्त सामान ही मिल पा रहा है। संयुक्त परिषद अध्यक्ष जगदीश जोशी का कहना था कि कार्यशाला में न कोई वाहन धोने वाला है और नहीं वाहनों में काम हो रहा है। इस कारण बसों को चलाने में दिक्कतें हो रही है।
नाराज कर्मियों ने कार्यशाला से बसों को स्टेशन तक भी नहीं आने दिया। बाद में एजीएम आरके आर्या के आश्वासन के बाद कर्मचारी माने। विरोध प्रदर्शन में अमर सिंह कोली, गजेंद्र द्विवेदी, महिपाल सिंह, हरीश भट्ट, किशन फर्त्याल, चंद्रशेखर, शेर सिंह, हिमांशु मेहता, किशन सिंह, देव सिंह, आत्मप्रकाश अग्निहोत्री, नरेंद्र कुमार, ललित जोशी, आनंद भट्ट, महिपाल, मुकेश कुमार आदि शामिल थे।
यात्रियों को झेलनी पड़ी फजीहत
लोहाघाट (चंपावत)। फोरमैन की तैनाती की मांग को लेकर दो घंटे से अधिक वक्त बसों का संचालन नहीं होने से मुसाफिरों को परेशानी झेलनी पड़ी। विरोध के चलते देहरादून और दिल्ली की बस सेवा के संचालन में देरी हुई। वरिष्ठ स्टेशन इंचार्ज भुवन चंद्र आर्या ने बताया कि बुधवार को विभिन्न रूटों में 13 बसों का संचालन हुआ। बाद में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए बरेली के लिए एक अतिरिक्त बस का संचालन किया गया। बुधवार को दिल्ली और देहरादून के लिए चार-चार, बरेली को दो, हल्द्वानी, ऋषिकेश, गुरुग्राम व नैनीताल के लिए एक-एक बसों का संचालन किया गया।
चंपावत में घंटों तक बस का इंतजार करते मुसाफिर
चंपावत। लोहाघाट में दो घंटे तक बसों के संचालन ठप होने का असर चंपावत के मुसाफिरों को भी भुगतना पड़ा। यहां के रोडवेज स्टेशन में काफी देर तक यात्री बसों का इंतजार करते रहे। देहरादून, दिल्ली ही नहीं, टनकपुर और उससे आगे जाने वालों को भी बस के लिए तरसना पड़ा।