विश्व मातृभाषा दिवस पर चंपावत में आयोजित गोष्ठी में विचार व्यक्त करते वक्ता।
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अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर जिला पुस्तकालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति के संस्कारों की संवाहक होती है।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा ही सबसे पहले इंसान को सोचने- समझने तथा व्यवहार की शिक्षा और समझ प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि मातृाभाषा के बिना किसी देश और क्षेत्र की संकल्पना बेमानी है। उन्होंने कहा कि मां के आंचल में पल्लवित हुई भाषा बालक के मानसिक विकास को पहला शब्द प्रदान करती है।
इस अवसर पर उपस्थित विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए डीएम ने कहा कि लक्ष्य समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। फिर भी विद्यार्थियों को छात्र जीवन से ही लक्ष्य निर्धारित कर उसके अनुरूप सकारात्मक सोच रखते हुए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने एक निर्धारित लक्ष्य के साथ एक अन्य विकल्प भी खुला रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोई भी कोचिंग संस्थान प्रतियोगिता की तैयारी के लिए आपकी 5 से 10 प्रतिशत तक मदद प्रदान कर सकती है, परंतु 90 प्रतिशत प्रयास आपको स्वयं करना होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को लाइब्रेरी से घर के लिए किताबें जारी करने के लिए शीघ्र उचित कदम उठाए जाएंगे तथा शीघ्र ही छात्रों को पुस्तकें पढने के लिए लाइब्रेरी से एक निश्चित तिथि के लिए अपने घर ले जा सकेंगे। इस अवसर पर डायट के प्राचार्य डॉ.अवनीश शर्मा, डॉ. पारूल शर्मा, खंड शिक्षाधिकारी हरेंद्र शाह, अंशुल बिष्ट आदि ने भी विचार रखे।