चंपावत। जिला मुख्यालय के छीड़ापानी में स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र में जहां विभिन्न प्रजाति की मछलियों पर शोध कार्य प्रगति पर है, वहीं इस साल अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों को चार साल के शोध के बाद रैनबो ट्राउट प्रजाति के 10 लाख से अधिक अंडे तैयार करने में सफलता मिली है। केंद्र में स्थित रैनबो ट्राउट हेचरी के जरिये इन अंडों से मत्स्य बीज तैयार किया जाएगा। तैयार मत्स्य बीज को स्थानीय स्तर पर काश्तकारों को उपलब्ध कराने के साथ ही विभिन्न राज्यों को मांग के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा।
केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. किशोर कुणाल ने बताया कि केंद्र के मत्स्य फार्म में विदेशी सिल्वर कार्प, असीला, सुनहरी महाशीर, बर्फानी ट्राउट प्रजाति की मछलियों पर शोध कार्य प्रगति पर है। इस बार रैनबो ट्राउट प्रजाति पर किया गया शोध रंग लाया है। केंद्र में फीडिंग के जरिये दस लाख से अधिक अंडे तैयार किए गए हैं। संवाद
आधुनिक हैचरी में तैयार होंगे मत्स्य बीज
चंपावत। छीड़ापानी में स्थापित आधुनिक हैचरी में रैनबो ट्राउट प्रजाति के मत्स्य बीज तैयार किए जाएंगे। इसके लिए फार्म ब्रीडिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। केंद्र प्रभारी के अनुसार एक किलोग्राम से अधिक वजन की मादा रैनबो ट्राउट मछली एक बार में दो हजार से अधिक अंडे देती है। दिसंबर से फरवरी माह तक चलने वाली हैचिंग प्रक्रिया के बाद लाखों की तादात में मत्स्य बीज तैयार हो जाएगा। जिन्हें उत्तराखंड के अलावा नागालैंड, सिक्किम, अरुणांचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश राज्यों में भेजा जाएगा। संवाद
ग्रोथ बढ़ाने के लिए छह माह से चल रहा शोध कार्य भी पूरा
चंपावत। छीड़ापानी केंद्र की ओर से पर्वतीय क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए भी अनुसंधान लगातार जारी है। वर्तमान में केंद्र में विभिन्न प्रजाति की मछलियों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए छह माह से चल रहा शोध कार्य पूरा हो गया है। जल्द ही केंद्र की ओर से अगले चरण में स्थानीय नदियों और नालों में हेचरी के जरिये से विभिन्न प्रकार की मछलियों के मत्स्य बीज छोड़े जाएंगे। संवाद
कोट
चंपावत के छीड़ापानी में स्थित अनुसंधान केंद्र ने पूर्व में सिल्वर कार्प और कॉमन कार्प प्रजाति की ग्रोथ बढ़ाने में कामयाबी हासिल की थी। ठीक उसी प्रकार इस बार रैनबो ट्राउट प्रजाति पर किया गया शोध कामयाब रहा।- देवाशीष शर्मा, निदेशक, शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र भीमताल।