चंपावत। आपात चिकित्सा सेवा 108 के हाल बेपटरी हैं, तो रोड से लगे अस्पतालविहीन इलाकों को सेवा देने वाली जैन वीडियो ऑन व्हीकल मोबाइल अस्पताल सेवा भी सात महीनों से ठप है। इसके चलते सिर्फ चंपावत जिले में ही इस दौरान लगने वाले 105 स्वास्थ्य शिविर नहीं लग सके हैं।
चमोली, उत्तरकाशी जिलों को छोड़कर प्रदेश में 11 जिलों के लोगों को इस सेवा के बंद होने से नुकसान हो रहा है। अकेले चंपावत जिले में ही 19 हजार से अधिक लोग इस सेवा से प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें मामूली इलाज के लिए भी लंबी दूरी तय कर चंपावत, लोहाघाट के अस्पताल आने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार से जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा का अनुबंध (एमओयू) फरवरी 2017 तक के लिए हुआ है लेकिन इस सेवा पर इस साल अप्रैल से ही ब्रेक लग गया है। सरकार से रकम न मिलने के चलते चलता-फिरता ये अस्पताल काम नहीं कर रहा है। 2009 से शुरू जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा के जरिए तल्लादेश, गुमदेश, लधिया घाटी, अमोड़ी सहित 15 ग्रामीण इलाकों में हर महीने निर्धारित कैंप लगाए जाते थे। इन कैंपों में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, खून की जांच की जाती है।
हर वैन में तीन डॉक्टर, लैब तकनीशियन, फार्मेसिस्ट, नर्स सहित कुल दस कार्मिक वैन के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों का इलाज करते हैं। बीपीएल मरीजों को नि:शुल्क दवाएं दी जाती थी। तल्लादेश के देवेंद्र जोशी, शेर सिंह महर, लधिया के भवान सिंह परवाल, गिरीश भट्ट, अमोड़ी के दीपक सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि इस वैन के बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों के डॉक्टर, अस्पतालविहीन इलाकों में भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड आदि जांच के लिए 75 किमी दूर चंपावत, लोहाघाट की दौड़ लगानी पड़ रही है। साथ ही जेब भी ढीली हो रही है।
चंपावत। जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा बंद होने से मरीजों के इलाज में तो दिक्कत आ ही रही है, डॉक्टर, कर्मियों की भी मुसीबत बढ़ गई है। जैन सेवा के जिला समन्वयक कुलदीप का कहना है कि नवंबर 2015 से मार्च 2016 तक का वेतन नहीं मिला है। एक चिकित्सा वैन में तीन डॉक्टर सहित 11 पैरा मेडिकल स्टाफ आदि कर्मी शामिल हैं। अब इन्हें अपने वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई बार ये कर्मी वेतन को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सम्मुख आवाज उठा चुके हैं, पर उनके सारे प्रयास नाकाम रहे।