जिला अस्पताल (डीएच) में इमरजेंसी में आई एक बीमार महिला के तीमारदारों पर डॉक्टरों के साथ अभद्रता और काम में बाधा डालने और धमकाने का आरोप लगाया गया है। नाराज डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने मामले की शिकायत मुख्य चिकित्साधीक्षक से करते हुए अभद्रता के आरोपियों पर कार्रवाई के अलावा सुरक्षा की मांग की। बाद में अस्पताल प्रशासन ने कोतवाली को तहरीर देकर विधिक कार्रवाई का आग्रह किया गया है।
शुक्रवार रात को चंपावत से पांच किलोमीटर दूर सेट्यूड़ा गांव की गोविंदी देवी को पेट में दर्द और रक्तचाप बढ़ने की वजह से जिला अस्पताल लाया गया। इमरजेंसी में तैनात डॉ. रवि कुमार, फार्मेसिस्ट प्रमोद पांडेय और वार्ड ब्वॉय निर्मल बिनवाल ने मरीज का इलाज किया। डॉक्टरों का दावा है कि रात करीब 11.10 बजे मरीज गोविंदी देवी के पति और ग्राम प्रधान मदन सिंह अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में आए और स्टाफ को धमकाते हुए सरकारी कामकाज में अवरोध पैदा करने लगे। आरोप है कि मरीज के पति ने अस्पताल स्टाफ को जान से मारने की धमकी भी दी।
डॉक्टरों ने पूरे मामले की जानकारी सीएमएस को दी। रात को ही मौके पर पहुंचे सीएमएस डॉ. आरके जोशी ने दोनों पक्षों को समझा-बुझा कर हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इस बीच नाराज डॉक्टरों ने सीएमएस को ज्ञापन देकर आरोपी पर कार्रवाई और सुरक्षा इंतजाम कराने की मांग की। कहा कि वे पूरी निष्ठा से अस्पताल में सेवा दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें जलालत झेलनी पड़ रही है।
ज्ञापन देने वालों में डॉ. रवि कुमार, डॉ. बैंकटेश द्विवेदी, डॉ. सुषमा नेगी, डॉ. अजय कुमार, विकास शर्मा, पीतांबर दत्त, नीलावती, फार्मेसिस्ट जितेंद्र वर्मा, कमला थापा, बबीता खंपा, सपना खंपा, हेमा आदि शामिल थे। सीएमएस ने शनिवार को कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। कोतवाल धीरेंद्र कुमार का कहना है कि अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। मामले की जांच कर जरूरी कार्यवाही की जाएगी। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है।
मैंने अस्पताल के स्टाफ के साथ बदसलूकी नहीं की है। बस इतना कहा कि मरीज को ठीक से देख नहीं रहे हो। कुछ हो गया तो ठीक नहीं होगा। इलाज के बजाय अस्पताल का स्टाफ मरीज और उनके तीमारदारों पर दबाव बना रहा है। बाद में जिला अस्पताल से मरीज को लेकर निजी अस्पताल गए और फिर खटीमा ले गए। अस्पताल में लगे सीसीटीवी को खंगाला जाए तो सच्चाई समाने आ जाएगी।
मदन सिंह, ग्राम प्रधान व मरीज का पति।
17 माह में हो चुके हैं चार विवाद
जिला अस्पताल में 2018 से अब तक डॉक्टरों और तीमारदार के बीच चार विवाद हो चुके हैं। इस साल 25 अप्रैल को एक प्रसूता के तीमारदारों और अस्पताल के बीच विवाद भी कोतवाली तक पहुंचा था। बाद में मामले को सुलझा लिया गया था। 30 मई को वैला गांव की एक प्रसूता द्वारा रोड किनारे शिशु को जन्म देने के मामले में भी कुछ जन प्रतिनिधियों और अस्पताल प्रशासन के बीच गरमागरमी हुई। वहीं इस साल 11 मार्च को आपातकालीन सेवा मिलने में देरी से एक महिला की मौत के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने नोटिस भी दिया है।