कुमाऊं विश्वविद्यालय के पहले कुलपति और वैज्ञानिक डॉ. डीडी पंत की 100वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उनके योगदान का स्मरण किया गया। मुख्य अतिथि वैज्ञानिक डॉ. बीएस बिष्ट ने कहा कि विकास और खासकर पिछड़े क्षेत्रों की तरक्की में वैज्ञानिक सोच, वैज्ञानिक विकास की सबसे ज्यादा भूमिका है।
हिमवत्स संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. पंत को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि डॉ. पंत पिछड़े क्षेत्रों के विकास के सबसे ज्यादा हिमायती थे। वीसी डॉ. पंत की जयंती के तहत कार्यक्रम गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, कपकोट के बाद अब चंपावत में आयोजित हुए। इसके बाद नैनीताल के बाद चेन्नई में जयंती वर्ष के कार्यक्रम का इस साल दिसंबर में समापन होगा।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई के प्रो.पीबी बिष्ट, हिमवत्स संस्था के सचिव डॉ. जीबी बिष्ट और केएस महर ने विज्ञान और शैक्षिक क्षेत्र के अलावा कुमाऊं विश्वविद्यालय के पहले वीसी के रूप में डॉ. पंत द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी दी। कहा कि डॉ. पंत पिछड़े पर्वतीय राज्यों की तरक्की के लिए क्षेत्रीय दल के पक्षधर थे।
इस वजह से उन्होंने उक्रांद के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. पंत तीन बातें (छात्र कभी छुट्टी पर नहीं होता, शिक्षक कभी धनी नहीं होता और जीवन को समझने के लिए वैज्ञानिक सोच से दूर न रहो) कहा करते थे।
डॉ. पीएस बिष्ट ने विज्ञान, गणित और अन्य क्षेत्रों में होने वाले बदलावों की जानकारी दी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र पांडेय ने ऑनलाइन पाठ्यक्रम के अलावा ऐप की बारीकियां बताईं। नैनीताल के डीएसबी कैंपस के डॉ. संदीप पांडेय ने कचरे की समस्या और उससे पेट्रोल सहित दूसरी वस्तुओं के निर्माण की जानकारी दी।
नगर पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा ने हिमवत्स संस्था द्वारा विश्वविद्यालय के पहले वीसी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों को छात्र-छात्राओं के ज्ञानवर्द्धन के लिए उपयोगी बताया। इस मौके पर जीजीआईसी की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए। आयोजन में हिमवत्स संस्था के डॉ. डीडी जोशी, डॉ. बीसी जोशी, बीडी फुलारा, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता अमरनाथ वर्मा, टीडी पांडेय, डॉ. एमपी जोशी, बसंत सिंह बिष्ट, जययदत्त भट्ट, मनोहर दत्त तिवारी, राजेंद्र गहतोडी, मोहन चंद्र रस्यारा आदि मौजूद थे।