लोहाघाट/पाटी। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ी और बैठकी होली पूरे शबाब पर है। महिला, पुरुष, बच्चे, बुजुर्ग सब होली के रंग में रंगे हैं। गांवों में होली के ढोलों की थाप पर होल्यार थिरकने को मजबूर हो रहे हैं। होल्यार टोली बनाकर गांव-गांव और घर-घर जाकर होली का गायन किया जा रहा है।
रविवार को लोहाघाट, बाराकोट और पाटी ब्लाकों के पुल्ला, दिगालीचैड़, रौंसाल, रायनगर चैड़ी, फोर्ती, बिशुंग, राईकोट, रावलगांव, इजड़ा, डैसली, बाराकोट, बर्दाखान, पाटी, भिंगराड़ा, रीठासाहिब, देवीधुरा आदि स्थानों में खड़ी और बैठकी होलियों की धूम मची हुई है। मिरगा मारन जाय पिया मोसे भूल भई है वा बन, अचरा मेरो छोड़ श्याम तेरि गऊ चली वृदावन को, आज यहीं रहो कौन बनमवासी आज यही रहो आदि होली गीतों के साथ झोड़ों का गायन कर रहे हैं। महिलाओं की बैठकी होली में आज बिरज में होली से रसिया, होली कैसे खेलूंगी में सांवरिया के संग आदि गीतों पर ठुमके लगाए गए। संवाद
अजहु उमर की बाली...
लोहाघाट। फोर्ती गांव में बैठकी होली का आयोजन किया गया। योगेश बगौली के आवास में आयोजित बैठकी होली का शुभारंभ होल्यारों ने सामूहिक गणेश वंदना गणपति को भज लीजै रसिक वो तो आदि कहावे के साथ किया। नवीन बगौली ने अजहु उमर की बाली, मोहन चंद्र बगौली ने राग यमन में मोसे खेलो ना होली, नवीन उपाध्याय ने मैं कैसे होली खेलूंगी सांवरिया के संग, प्रकाश बगौली ने मोह पकड़ो ना बय्यां होली का गायन किया। वहां राजू पुनेठा, सोनू चैबे, विजय पुनेठा, उमेश पुनेठा, सुमित, धीरु, चंदू उपाध्याय, सतीश आदि ने सुर में सुर मिलाया। संवाद