कभी दूध की नदी कहे जाने वाले देश में भले ही अब दूध की बहुतायत नहीं है, लेकिन जल्द ही चंपावत के लोगों को दूध के लिए दुकानदारों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कुमाऊं की पहली मिल्क वाइंडिंग मशीन (एटीएम जैसी मशीन) जिले को मिलने जा रही है। इस मशीन में रुपये डालने पर दूध खुद-ब-खुद ग्राहक को मिलेगा। इस मशीन की शुरुआत 20 जनवरी को होगी।
राष्ट्रीय डेरी विकास योजना के तहत 4.58 लाख रुपये की मिल्क वाइंडिंग मशीन वाले वाहन के टैंक की क्षमता 500 लीटर है। दूध को सुरक्षित रखने के लिए स्टोरेज टैंक में थर्माकोल लगाया गया है। दुग्ध संघ ने मशीन वाले वाहन का बृहस्पतिवार को परिवहन विभाग में पंजीकरण कराया है। एक ग्राहक मशीन से कम से कम पांच रुपये का दूध लिया जा सकेगा, जबकि अधिकतम दूध 10 लीटर तक लिया जा सकेगा। दूध की कीमत फिलहाल 30 रुपये लीटर तय की गई है। वाहन में ड्राइवर के अलावा दुग्ध संघ का एक सहायक होगा। मशीन में पीछे की तरफ मीटर लगा है, जिसमें दूध की मात्रा और रुपये पर क्लिक करने से दूध मिलेगा।
सूखे के बावजूद बढ़ गया 1420 दूध का उत्पादन
चंपावत जिले में इस बार बरसात करीब 25 प्रतिशत कम हुई और अब जाड़ों में भी एक बूंद बारिश नहीं हुई, बावजूद इसके जिले में दूध के उत्पादन में कमी नहीं हुई है। दुग्ध संघ के मुताबिक जनवरी में अब तक 9977 लीटर दूध एकत्र हुआ है, जबकि इसी दौरान पिछले साल 8557 लीटर दूध एकत्र हुआ था। वहीं दो साल पहले दूध की ये मात्रा 8600 लीटर थी। दुग्ध संघ प्रबंधक एसएस बोरा ने बताया कि दूध के उत्पादन में कमी नहीं होने की वजह उत्पादकों को सरकार द्वारा प्रति लीटर चार रुपये बोनस देने के अलावा चारा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना रहा है। विभाग ने बताया कि पशु आहार अनुदान इस वर्ष 24 लाख रुपये मिला, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4 लाख रुपये ज्यादा है।
फिलहाल खुले में बिक रहा दूध
चंपावत में पैकेट प्लांट नहीं होने की वजह से आंचल का करीब 300 पैकेट दूध खटीमा से यहां आता है, लेकिन अधिकांश दूध खुले में बंटता है। दुग्ध वितरक रमेश चंद्र जोशी ने बताया कि रोजाना करीब 400 लीटर दूध बिक्री होता है। दुग्ध संघ एकत्र होने वाले 9977 लीटर दूध में से अधिकांश ऊधमसिंह नगर जिले को भेजता है।