टनकपुर (चंपावत)। जिले के प्रसिद्ध श्री ब्यानधुरा धाम में कार्तिक पूर्णिमा पर्व यानी 28 नवंबर को भव्य मेला लगेगा। मेले से एक दिन पूर्व 27 नवंबर को देव डांगर एड़ी देवता के डोले को विधि-विधान से शारदा के कांकर घाट में स्नान करा कर तलियाबांज मंदिर से ब्यानधुरा धाम ले जाकर स्थापित करेंगे। मेले की तैयारी को लेकर मंदिर समिति ने बैठक कर व्यवस्थाओं को लेकर विचार विमर्श किया गया।
ऐड़ी देवता के प्रसिद्ध धाम श्री ब्यानधुरा मंदिर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर भव्य मेला आयोजित होता है। कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले ब्यानधुरा के पुजारियों के गांव तलियाबांज स्थित मंदिर से ऐड़ी देवता का डोला उठता है और शारदा के कांकर घाट में डोले को विधि-विधान से स्नान करा कर छड़ीदारों की ओर से तलियाबांज स्थित मंदिर से पैदल ब्यानधुरा धाम पहुंचाया जाता है। डोला तलियाबांज से अमगढ़ी, पाटली, कठौल गांव होकर ब्यानधुरा पहुंचता है। रातभर जागरण और दूसरे दिन विशेष पूजा, अर्चना होती है, जिसमें नौ ग्राम पंचायतों बुडहम, डांडा, ककनई, मथियाबांज, तलियाबांज, नौलापानी, धूरा, बयाला, झालाकूड़ी के ग्रामीण सामूहिक पूजा एवं भंडारे का आयोजन करते हैं। मेले में नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर समेत खटीमा, नानकमत्ता, सितारगंज आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कार्यकर्ताओं को सौंपी हर व्यवस्था
टनकपुर। श्री ब्यानधुरा मंदिर समिति बैठक में मेले की व्यवस्थाओं की रणनीति तय कर समिति सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई। पुजारी मोहन जोशी को डोला स्नान और पूजा विधान, अध्यक्ष शंकर जोशी को वाहन व्यवस्था, विशन सिंह महरा, पवन महरा को भंडारा, भोजन, जलपान व्यवस्था, जीवन चौहान, सतपाल जोशी को पथ प्रकाश व्यवस्था, दयाकिशन पुजारी को पेयजल, प्रकाश जोशी, प्रेम सिंह, खीम सिंह को बिछावन व्यवस्था सौंपी गई है। समिति अध्यक्ष पं. शंकर जोशी की अध्यक्षता में महामंत्री जमन सिंह महरा ने संचालन किया। बैठक में मंदिर समिति के नारायण सिंह महरा, जगदीश महरा, हयात सिंह बिष्ट, नंदाबल्लभ जोशी, मोहन जोशी, रुद्र सिंह महरा, धर्मेंद्र सिंह महरा आदि थे।