चंपावत। जिले में मंडी होने के बावजूद किसानों को उपज बेचने के लिए काफी परेशान होना पड़ रहा है। मैदानी क्षेत्र टनकपुर की मंडी 75 किमी दूर होने से दूरस्थ क्षेत्र के काश्तकार कृषि उत्पाद वहां नहीं ले जाते हैं क्योंकि इसमें उनका खर्च ही इतना बढ़ जाता है कि उपज से मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं निकल पाती।
जिले के पहाड़ी क्षेत्र में मडुवा, गहत, नाशपाती, माल्टा, नींबू, संतरा, अदरक, आलू, टमाटर बहुतायत में होता है। वर्ष 2022 में ही इन कृषि उत्पादों की 61 हजार मीट्रिक टन से अधिक पैदावार हुई लेकिन इन उत्पादों की बिक्री के लिए कोई बाजार नहीं है।
ऐसी स्थिति टनकपुर में मंडी समिति होने के बावजूद है। चंपावत से 75 किमी दूर की इस समिति से पहाड़ के किसानों को कोई लाभ नहीं नहीं मिल पा रहा है। बाजार की उपलब्धता नहीं होने से यहां के किसानों को लागत का भी मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
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क्षेत्र में नींबू प्रजाति से लेकर गहत की अच्छी पैदावार होती है लेकिन इसका लाभ यहां के किसानों को नहीं मिल रहा है। ढुलान में मोटी रकम खर्च कर उपज को चंपावत ले जाकर बेचने पर लागत भी नहीं निकल पाती है। - हीरा सिंह, मंच।
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गुमदेश क्षेत्र की विविधतापूर्ण जलवायु में सिट्रस फल (संतरा, नींबू, माल्टा, कीनू) से लेकर आम, केले खूब होते हैं लेकिन मंडी नहीं होने से सीमांत के काश्तकारों को फसल की कीमत नहीं मिल पा रही है। लोहाघाट में मंडी कार्यालय खोला जाना चाहिए। - नकुल पंत, गुमदेश।
इनका कहना
नाशपाती, माल्टा और नींबू की बिक्री के लिए जिले में चार स्थानों पर खरीद केंद्र लगाए जाते हैं जहां सरकारी दर पर इन फलों को खरीदा जाता है। उद्यान विभाग चंपावत में साप्ताहिक हाट के जरिए किसानों को बाजार उपलब्ध करा रहा है। - टीएन पांडेय, जिला उद्यान अधिकारी।
विभाग की ओर से बाजार की कोई व्यवस्था नहीं है। मडुवे को सहकारी समिति के जरिए किसानों से खरीदने की व्यवस्था जरूर है। इस बार मडुवे को 3846 रुपये क्विंटल में खरीदा जाएगा लेकिन इसके अलावा किसी अन्य उत्पादों को लेने की व्यवस्था नहीं है। - जीएस भंडारी, मुख्य कृषि अधिकारी।
कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए परंपरागत कृषि योजना के तहत खुलेंगी 27 दुकानें
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। जिले में आलू, राजमा, सब्जी और फलों का अच्छा उत्पादन होता है। मुनस्यारी आलू और राजमा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। मुनस्यारी के राजमा उत्पादक गांवों में सड़क नहीं पहुंच पाई है। इसके चलते उत्पादकों को घोड़े-खच्चरों से उत्पाद मुनस्यारी पहुंचाने पड़ते हैं। सड़क नहीं होने से किसानों का ढुलान के भाड़े में काफी पैसा खर्च हो जाता है। अब कृषि विभाग रीप और एनआरएलएम के माध्यम से 27 दुकानें खोलकर किसानों के उत्पादों की बिक्री करेगा। इनका संचालन महिला समूहों के माध्यम से होगा।
बाजार नहीं होने से जिले के माल्टा, संतरा फल पट्टी वाले किसानों की भी यही स्थिति है। फलों को बंदर खा जाते हैं या फिर अधिकांश फल सड़ कर खराब हो जाते हैं। पिथौरागढ़ के नजदीकी बांस, पुनेड़ी सहित अन्य गांवों से किसान सब्जी उत्पादों को स्वयं बाजार लाकर बिक्री करते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि और उद्यान विभाग की ओर से योजना बनाई गई हैं। कृषि अधिकारी ऋतु टम्टा ने बताया कि रीप और एनआरएलएम के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बेचा जा रहा है। परंपरागत कृषि योजना के तहत 27 दुकानें बनाई जा रही हैं। इसमें उद्यान विभाग 10 और कृषि विभाग 17 दुकानें बनाएगा। गणाई गंगोली में विपणन का कार्य शुरू कर दिया है। पिथौरागढ़ में मूनाकोट में बनाया जा रहा है। यहां किसानों के स्थानीय उत्पाद रखे जाएंगे। इससे किसानों को अच्छा लाभ मिल सकेगा।