सड़क दुर्घटनाओं में 2020 तक 50 प्रतिशत कमी लाने का प्रदेश सरकार का लक्ष्य है। इस दूरगामी लक्ष्य के साथ ही वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तात्कालिक कदम उठाने के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने 25 जनवरी को हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिला प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग को आदेश दिए थे, लेकिन धरातल पर कुछ और ही नजर आ रहा है। डेंजर स्पॉट चिन्हित करना बस रस्म अदायगी बन गया है।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में ओवरलोडिंग, तेज गति, नशे में वाहन चलाने, सीट बेल्ट और हेलमेट के बगैर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की हिदायत दी गई। हादसे के मद्देनजर संवेदनशील स्थानों पर संकेतांक चिन्ह बनाने, साइन बोर्ड लगाने, दुर्घटना को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए, मगर इनमें से अधिकतर निर्देशों का यहां पालन नहीं हो सका है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच पर अमरूबैंड, सिन्याड़ी, चल्थी, बेलखेत, अमोड़ी, स्वांला, धौन और बनलेख के पास 23 स्थान बेहद खतरनाक है, मगर इनमें से अधिकतर जगह पर पैरापिट या क्रस बैरियर नहीं लगाए गए हैं। उल्टे बारहमासी सड़क के निर्माण के चलते बनलेख से स्वांला के बीच तीन क्रस बैरियर टूट चुके हैं। स्वांला के सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वरी भट्ट का कहना है कि पैरापिट नहीं होने से खाई की तरफ बचाव का कोई सहारा नहीं है। इसी तरह जिला अस्पताल के पास ही एनएच पर खाई के पास कोई पैरापिट नहीं लग सका है।
पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र गुंज्याल और अपर जिलाधिकारी हेमंत कुमार वर्मा का कहना है कि मुख्य सचिव के निर्देशों का पालन कराया जा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक अमला पुलिस और परिवहन विभाग से मिलकर निरंतर अभियान चला रहा है। वहीं एआरटीओ रश्मि भट्ट का कहना है कि परिवहन विभाग ने चिह्नित किए गए खतरनाक स्थानों पर पैरापिट बनाने के लिए सड़क बनाने वाली संस्था को पत्र भेजा है।