बाराकोट विकासखंड के कई गांवों के लोगों को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान कब है, इसकी जानकारी तक नहीं है। लोकतंत्र के महापर्व में महज एक दिन बचा हुआ है लेकिन ग्रामीण यह भी नहीं जानते कि ईवीएम के जरिए किस प्रकार वोट दिया जाता है।
बाराकोट क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी उनके यहां नहीं आया। उन्हें ईवीएम की कोई जानकारी भी नहीं दी गई है। उनका कहना है कि ईवीएम को देखते ही उन्हें घबराहट होने लगती है और जो बटन हाथ लगे उसे दबाकर वे चले आते हैं। लोगों का कहना है कि ईवीएम से वोट डालने के तरीके की ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप लगाकर जानकारी दी जानी चाहिए थी।
ईवीएम की जानकारी न होने से कई मतदाता संकोच के मारे वोट डालने तक नहीं आते। स्वीप के नोडल अधिकारी जीवन कलौनी का कहना है कि बाराकोट ब्लॉक में मतदाता जागरूकता रथ के जरिए पूरे क्षेत्र में लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया गया। ईवीएम टीमों की ओर से किस प्रकार ईवीएम से मतदान किया जाता है, इसका प्रदर्शन भी किया गया था।
मतदान की तारीख पता नहीं: जानकी
सूंगरखाल की जानकी देवी का कहना है कि लोकसभा चुनावों के लिए मतदान कब है इसकी कोई जानकारी नहीं है। बैलेट मतपत्र में ठप्पा लगाकर वोट देना आसान होता है। ईवीएम से वोट कैसे दिया जाता है, इसकी जानकारी नहीं है।
मतदान के नाम पर कोई भी बटन दबा देते हैं: खष्टी
ढुंगा की खष्टी देवी का कहना है कि मतदान कैसे किया जाना चाहिए, इसकी जानकारी देने के लिए कोई भी कर्मी नहीं आया। उनका कहना है कि वह नहीं जानतीं कि ईवीएम से किस प्रकार वोट दिया जाता है। उनका कहना है कि मशीन में कोई भी बटन दबाकर मतदान करके आ जाते हैं। फोटो 09 एलएचजी 02पी
बूथ के भीतर होती है घबराहट: फकीर
काकड़ के फकीर राम का कहना है कि ईवीएम के जरिए वोटिंग करने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बूथ के भीतर जाकर घबराहट होने लगती है। बटनों का अंदाज न होने से जिस पर अंगुली चले जाए, उसे दबा देते हैं।
अधिक आसान है बैलेट मतपत्र: दानी राम
पिटनगांव के दानी राम का कहना है कि लोकसभा चुनावों के लिए मतदान कब है इसकी कोई सूचना ही नहीं मिली है। वह ईवीएम की तुलना में बैलेट मतपत्र से मतदान करना अधिक सरल मानते हैं।