लोहाघाट (चंपावत)। कैमुना क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सहित अन्य लोगों पर सोसायटी में जमा लोगों के धन के गबन का आरोप लगा है। सोसायटी के स्थानीय शाखा प्रबंधक की तहरीर पर पुलिस ने प्रबंध निदेशक समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लोहाघाट थाना प्रभारी थानाध्यक्ष देवेंद्र मेहता ने बताया कि नगर के डिग्री कॉलेज तिराहे पर स्थित कैमुना क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के शाखा प्रबंधक नीरज वर्मा ने थाने में तहरीर देकर कहा कि उनकी सोसायटी में वर्ष 2014 से करीब सात सौ लोगों ने आरडी, एफडी, डेली कलेक्शन के जरिये करीब एक करोड़ से अधिक रुपये जमा किए हैं। नीरज का कहना है कि मियाद पूरी होने पर कई खाताधारकों को करीब सात लाख रुपये का भुगतान किया जाना है।
सोसायटी के प्रबंध निदेशक से कई बार लोगों की धनराशि वापस करने के लिए पत्राचार किया गया, लेकिन वहां से रुपये नहीं मिल पा रहे हैं। जमाकर्ताओं की ओर से राशि लौटाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भविष्य में लोगों को करीब 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। एसओ देवेंद्र ने बताया कि शाखा प्रबंधक नीरज की तहरीर पर रविवार शाम सोसायटी के एमडी प्रदीप अस्थाना निवासी अलीगंज लखनऊ के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 409 और अन्य लोगों के खिलाफ उत्तराखंड निक्षेपक जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा तीन के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की विवेचना एसआई देवेंद्र मनराल कर रहे हैं।
एक अन्य चिटफंड कंपनी में भी फंसा है लोगों का दो करोड़ रुपया
चंपावत। पाटी क्षेत्र के सैकड़ों लोग एक चिटफंड कंपनी से अपनी खून-पसीने की कमाई वापस पाने के लिए जूझ रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि दिसंबर 2015 से उन्हें रकम वापस करने का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन पुलिस में शिकायत करने के बावजूद उनके रुपये आज तक नहीं मिले।
पाटी ब्लाक के मूलाकोट क्षेत्र के लोगों का कहना है एक चिटफंड कंपनी ने एक स्थानीय व्यक्ति को एजेंट बनाकर जनवरी 2010 से अब तक दो करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा कराई। आरडी (आवर्ती जमा खाता) और अन्य योजनाओं के जरिये साढ़े पांच साल बाद 18 प्रतिशत ब्याज के साथ जमा रकम वापस करने की बात कही। मूलाकोट क्षेत्र के ही 210 ग्रामीण उसके झांसे में आ गए। आरडी पूरा होने के बाद भुगतान के बजाय सिर्फ आश्वासन दिए जाते रहे। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच करने के साथ निवेशकों से खाते में जमा रकम के दस्तावेज देने को कहा गया है। इसी तरह लोहाघाट क्षेत्र में एक अन्य कंपनी में भी लोगों के लाखों रुपये डूब चुके हैं।