बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा हकीकत में कितना कामयाब है, यह बड़ा सवाल है, लेकिन आदर्श कालोनी में एक बुजुर्ग महिला इस नारे को अमलीजामा पहना रही है। अपने चार नातनियों (पोती) और दो नाती (पोते) का यह महिला न केवल भरण-पोषण कर रही है, बल्कि स्कूली शिक्षा भी दे रही है।
आदर्श नगर निवासी जैंता आमा (60) खुद तो पढ़ी-लिखी कम है, लेकिन वह पढ़ाई का महत्व जानती है। इसलिए वह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे को जमीनी हकीकत देने में जुटी है। आमा के एक लड़का दिलीप और दो लड़कियां पुष्पा और राधा हैं। सभी विवाहित हैं, लेकिन दामाद की मौत के बाद से बेटी पुष्पा अपनी मां के साथ रहती है। बहू भी चल बसी और बेटा दिलीप रोजगार के लिए दिल्ली के एक होटल में काम करने के चलते घर से बाहर है। अब घर में कमाऊं व्यक्ति नहीं होने के कारण पुष्पा, उसकी बेटियां शिवानी, अंजली के अलावा बेटे दिलीप की बेटी प्रियंका, भावना, बेटे गौरव और युवराज की जिम्मेदारी जैंता आमा पर है। रोजगार का जरिया नहीं होने के चलते आमा कागज की थैली बनाकर गुजर-बसर कर रही हैं। आमा बताती हैं कि इससे करीब 4 से 5 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस रकम से आमा घर चलाने के साथ ही सभी बालिकाओं को पढ़ा भी रही हैं। शिवानी ग्यारहवीं, अंजलि नौंवी, प्रियंका पांचवीं, भावना दो में, गौरव छठी में और युवराज पहली में है।
थैली बनाने में परिवार के बच्चे भी आमा का हाथ बंटाते हैं। आमा का कहना है कि वह बेटियों का सही ढंग से पालन पोषण कर उन्हें उच्च शिक्षा देने का प्रयास करेंगी। निपुण निर्बल सहायता समूह से उन्हें सहारा मिला है।
निपुण समूह ने किया था सम्मान
निपुण निर्बल सहायता समूह आमा की यदाकदा मदद करता है। समूह के अध्यक्ष विपिन गोर्खा, सचिव रेनू देवी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की मुहिम को साकार रूप दे रही जैंता आमा को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी कर चुकी है। वहीं यह संस्था बच्चों को स्कूल बैग, कापियां, पैन आदि सामान भी समय-समय पर वितरित करती रही है।