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Champawat News: बिना भवन के मचियाड़ जीआईसी का कर दिया उच्चीकरण

Fri, 31 Jan 2025 11:29 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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रीठा साहिब (चंपावत)। जीआईसी मचियाड़ में अव्यवस्थाओं के बीच 100 से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई चल रही है। विद्यालय को उच्चीकृत तो कर दिया गया, लेकिन इंटर की कक्षाओं का संचालन आज भी हाईस्कूल के कक्षों में हो रहा है। लंबा समय बीतने के बाद भी इंटर के विद्यार्थियों के लिए नया भवन नहीं बनाया गया।
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विद्यालय में शिक्षकों की कमी भी चल रही है। बच्चों की पढ़ाई दो प्रवक्ताओं के सहारे चल रही है। हाईस्कूल में पांच टीचर स्थायी और सात अतिथि शिक्षक तैनात हैं। इंटर में संस्कृत, राजनीति विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं हैं। विद्यालय में बिजली व्यवस्था अधिकतर समय खराब रहती है।
विद्यालय में सोलर पैनल लगा है, वह भी खराब है। चहारदीवारी नहीं होने से लावारिस पशु और जंगली जानवरों अक्सर आ जाते हैं। 1980 बना विद्यालय का भवन अब बदहाल हो चुका है। विद्यालय भवन की छत बारिश में टपकती रहती है और फर्श जगह-जगह पर टूटा पड़ा है। कमरों के दरवाजे और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं। विद्यालय में छात्र संख्या भी 109 है। एसएमसी की ओर से इस मामले में प्रशासन सहित शिक्षा विभाग को बार-बार अवगत कराया गया है।
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बारिश में होती है अधिक दिक्कतें

रीठा साहिब (चंपावत)। स्कूली बच्चों के विद्यालय तक आने जाने के रास्ते ठीक नहीं हैं। बारिश के समय में बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। विद्यालय में फोर्थ क्लास कर्मचारी तक नहीं है। रात्रि चौकीदार की भी कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालय के शिक्षकों को ही सभी कार्य करने पड़ रहे हैं। विद्यालय का कंप्यूटर खराब है। हाईस्कूल में लैब है, जो इंटर के कक्षाओं के लिए भी चल रही है।

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तीन विद्यालय के 97 छात्र-छात्राएं देंगे बोर्ड परीक्षा

रीठा साहिब (चंपावत)। राइंका मछियाड़ में तीन विद्यालयों के बोर्ड परीक्षाएं होनी है। तीन विद्यालयों के 97 छात्र-छात्राएं जीआईसी मछियाड़ में परीक्षा देंगे। पानी की समस्या होने पर भोजन माता को पेयजल के लिए भटकना पड़ता है। एसएमसी अध्यक्ष राजेंद्र कोटिया ने कहा कि समस्याओं के संबंध में कई बार शासन-प्रशासन और शिक्षा विभाग को पत्र भेजा, लेकिन बजट नहीं मिला। बताया कि विद्यालय तक मोटर मार्ग स्वीकृत है, लेकिन कच्ची सड़क पर आवाजाही में दिक्कत हो रही है। स्कूल में माइक और स्पीकर तक नहीं है। खेल मैदान तो है, लेकिन खेल सामग्री नहीं है। इंटर की कक्षाओं के लिए भी कक्ष निर्माण के लिए बजट स्वीकृत होना चाहिए। छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर भी नहीं है।
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