मां पूर्णागिरि धाम के मेले में हर साल 25 लाख तीर्थयात्री शीश नवाते हैं लेकिन अभी तक मेले की सरकारी अवधि में रात के उजाले के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। इस बार 11 मार्च से 15 जून तक चलने वाले मेले में भी बिजली व्यवस्था ठेके पर ही होगी। इस पर सबसे ज्यादा हिस्सा खर्च है। 2011 से अब तक नौ मेले में कुल 872 दिनों में 4.21 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यानि औसतन रोजाना 48287 रुपये बिजली पर खर्च हुए।
पूर्णागिरि धाम में बिजली व्यवस्था को बेहतर करने के लिए ठुलीगाड़ से मुख्य मंदिर तक वर्षों पूर्व 68 लाख रुपये से विद्युतीकरण कराया गया। मेला अवधि में हर वक्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मेला आयोजक संस्था जिला पंचायत मेले में ठेका देती है लेकिन विद्युतीकृत होने से पूर्व और बाद की अवधि में ठेके की रकम में कमी नहीं आई।
2019 में 105 दिन के सरकारी मेला अवधि में 40 लाख रुपये खर्च हुए हैं। जबकि 2011 में बिजली पर महज 23.20 लाख रुपये खर्च हुए। जिला पंचायत का कहना है कि मेला क्षेत्र के रास्तों को जगमगाने के लिए बिजली का ठेका दिया जाता है। ठेकेदार द्वारा जनरेटर के जरिए हर वक्त रोशनी की व्यवस्था की जाती है। वहीं ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार का कहना है कि पूर्णागिरि क्षेत्र में सामान्य वक्त में बिजली की आपूर्ति सुचारू रहती है लेकिन मेला अवधि में बिजली की अधिक खपत और हर समय उजाले के लिए जनरेटर जरूरी है।
अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि मां पूर्णागिरि धाम मेला क्षेत्र में बिजली के स्थायी प्रबंध करने के जिला प्रशासन ने आदेश दिए हैं। स्थायी व्यवस्था कराने में कुछ वर्ष लगेंगे। इसके लिए बिजली विभाग को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
बिजली व्यवस्था की ई-टेंडिरंग आज
चंपावत। 11 मार्च से शुरू होने वाले मां पूर्णागिरि मेले की बिजली व्यवस्था के लिए ई-टेंडरिंग सात फरवरी को होगी। अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि ई-टेंडरिंग शुक्रवार को टनकपुर एसडीएम कार्यालय में होगी।
पूर्णागिरि धाम के विद्युतीकरण के बाद बिजली व्यवस्था पर होने वाला व्यय:
वर्ष मेलावधि (दिनों में) खर्च (लाख रुपये में)
2011 92 23.20
2012 99 27.70
2013 89 35.28
2014 90 49.24
2015 101 67.37
2016 82 65.40
2017 103 65.09
2018 105 47.79
2019 105 40.00
कुल योग 872 421.07
मेले में बिजली व्यवस्था पर मोटी रकम खर्च होती है। इस बेतहाशा खर्च को रोकने के लिए स्थायी कदम उठाए जाएंगे। ककरालीगेट से मुख्य मंदिर तक मेला अवधि में हर वक्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में स्थायी प्रबंध का प्रस्ताव भेजा जाएगा। सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम।