बारिश न होने और भीषण गर्मी के चलते लोहावती नदी नाले में तब्दील हो गई है। बनस्वाड़, फोर्ती पेयजल योजनाएं ठप पड़ गई है। चौड़ी लिफ्ट योजना, नलकूप के अलावा तीन टैंकरों एवं दो पिकअप से लगातार पानी ढोकर मुख्य टैंक में डाला जा रहा है। नगर के लोगों की पूरी निर्भरता अब हैंडपंपों, नर्सरी गधेरे, अक्कलधारा में हो गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों की 80 पेयजल योजनाओं के स्रोतों में भारी कमी आ गई है, जिसमें से रौंतली माहरा, फोर्ती, चौडी की पेयजल योजनाएं सूखे की भेंट चढ़ गई हैं। अधिकांश योजनाएं सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। 60 फीसदी पेयजल योजनाओं में अब तीसरे दिन जलापूर्ति शुरू करने से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के लिए हाहाकार मचा है। गाड़-गधेरों से पानी लाकर लोग प्यास बुझा रहे थे, लेकिन अब वहां का जल स्तर भी बहुत कम हो गया है। पुलहिंडोला, कलीगांव, फोर्ती, सैरीगैर, खूना मलक, टूंणा, पाटन-पाटनी, राईकोट, चौड़ी गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। पेयजल के लिए नौलों में लोगों की दिन रात भीड़ लगी रहती है।
कम नहीं हुआ पेयजल संकट, बच्चे भर रहे पानी
चंपावत। लगातार गर्मी के चलते क्षेत्र में पेयजल का संकट लगातार बढ़ रहा है। एक दिन छोड़कर नलों से पानी की आपूर्ति करना भी कठिन हो रहा है। पानी के गंभीर संकट के चलते अब घर के बड़े ही नहीं छोटे स्कूली बच्चे भी पानी ढो रहे हैं। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि जंगल की आग एवं बढ़ रही तपिश से पेयजल स्रोत और नीचे आ गया है। इस वजह से अब 2.5 लाख लीटर से भी कम पानी मिल पा रहा है। विभाग का दावा है कि टैंकरों और पिकअप से पानी की आपूर्ति कर लोगों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
टैंक की सफाई हुई, नहीं होगी कई जगह आपूर्ति
लोहाघाट। जल संस्थान द्वारा बनस्वाड़ पेयजल योजना के जीजीआईसी परिसर स्थित टैंक की रविवार को सफाई की गई। इससे पहले शनिवार को संस्थान द्वारा कचहरी वार्ड, कोर्ट कालोनी, डिग्री कॉलेज रोड, लोनिवि कालोनी, ठाडाढुंगा मोहल्लों में एक साथ जलापूर्ति कर दी थी। जलकल अभियंता पवन बिष्ट के अनुसार टैंक की सफाई के कारण अब इन क्षेत्रों में मंगलवार को ही जलापूर्ति की जाएगी।