ग्रामीण क्षेत्रों से निर्मल बहकर आने वाली लोहावती नदी लोहाघाट शहर में आते-आते कूड़े और सीवर से दूषित हो रही है। इसके रंग को देखकर यह किसी नाले जैसी दिखती है। इसके किनारे ही लोग अपनों का अंतिम संस्कार करते हैं। दूसरों को तारने वाली लोहावती खुद के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।
इसमें जगह-जगह गंदगी के अंबार लगे हैं। संरक्षण के लिए अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है। कुछ संगठन सफाई के लिए स्वच्छता अभियान चलाते हैं लेकिन यह कुछ ही दायरे तक सीमित रहता है। सलना और बिशंग से होते हुए कोलीढेक झील तक यह लगभग साफ है। लोग इसकी निर्मलता को बनाए रखते हैं। उन्हें नदी के महत्व का पता है लेकिन कोलीढेक झील के बाद यह प्रदूषित होती चली जाती है।
इन नालों से समाती है नदी में गंदगी
सीवर लाइन न होने के कारण लोहाघाट, बाड़ीगाड़, पाटन गाड़ और हिटलर मार्केट क्षेत्र से निकलने वाले नालों से घरों की गंदगी इसमें समाती है। नगर से करीब पांच किमी दूर तक यह प्रदूषित है। क्षेत्र के लोग इसकी बदहाली से चिंतित हैं लेकिन कोई विकल्प नहीं है।
एक हिस्से में अभियान चलाकर कर ली जाती है इतिश्री
पूरी नदी में कभी भी स्वच्छता अभियान नहीं चलाया गया है। मात्र एक हिस्से में अभियान चलाकर इतिश्री कर ली जाती है। नगर पालिका, व्यापार संघ, आईटीबीपी, प्रशासन, राजकीय पीजी कॉलेज के एनएसएस, एनसीसी कैडेट्स की ओर से नदी में शिवालय मंदिर के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। उस स्थान पर तो नदी साफ हो जाती है लेकिन अन्य जगहों पर इसके हाल बेहाल हैं।
जिम्मेदारों की बात
नदी में नगर पालिका की ओर से समय-समय पर स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। कूड़ा और गंदगी डालने वालों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। नदी में गंदगी डालने वालों पर चालानी कार्रवाई भी की जाएगी। - सौरभ नेगी, ईओ नगर पालिका, लोहाघाट
लोगों की पीड़ा
प्रशासन नदी के संरक्षण के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कर रहा है। यह पूरी तरह से दूषित हो चुकी है। यदि समय रहते इसके संरक्षण की दिशा में काम नहीं किया गया तो इसका अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो जाएग।
- जगदीश मेहता, व्यापारी
लोहाघाट नगर का कूड़ा-कचरा और सीवर सीधे लोहावती में डाला जा रहा है। इसके किनारे वृहद पौधरोपण किया जाना चाहिए। इससे पानी के नए स्रोत खुलेंगे। इसके संरक्षण के लिए धरातल पर काम करने की जरूरत है।
- बृजेश माहरा, राज्य आंदोलनकारी
वर्षों पूर्व यह नदी लोहाघाट की शान हुआ करती थी लेकिन लोगों की नासमझी के चलते अब यह मैली हो गई है। लोग अपने घरों का सीवर और कूड़ा-कचरा नालियों के जरिये इसमें बहा रहे हैं। स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो रहा है।
- कैलाश माहरा, पूर्व नगर पंचायत सभासद
नगर सहित आसपास के गांवों से लोग थैलियों में कूड़ा भर-भर कर लाते हैं और नदी-नालों में डाल देते हैं जिससे लोहावती प्रदूषित हो रही है। इसको साफ-स्वच्छ रखने की किसी को चिंता नहीं है। इसकी सफाई के लिए सभी को एकजुट होकर आगे आना होगा।
- नवीन ओली, व्यापारी