लोहाघाट में पाइप लाईनों में लीकेज होने से इस तरह बर्बाद होता पानी।
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क्षेत्र में पानी को लेकर मारामारी मची है। कई जगह लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। शहर में तीसरे-चौथे दिन पानी मिल पा रहा है, वह भी जरूरत का एक-तिहाई। वहीं, ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप खराब होने से लोग गाड़-गधेरों से पानी ढोने को मजबूर हो रहे हैं। कई जगह लाइनों में लीकेज होने से बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद भी हो रहा है।
शहर में पेयजल के लिए लोग इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। नलों में तीसरे या चौथे दिन पानी की सप्लाई से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। नर्सरी गधेरे, शिवालय मंदिर के पास बने स्टैंड पोस्ट, अक्कल धारा में हर समय लोगों की लंबी लाइन लग रही है। पुलहिंडोला में लगे हैंडपंप अधिकांश समय खराब होने के कारण लोग पानी को तरस रहे हैं।
वहीं, गर्मी के कारण पेयजल स्रोतों में लगातार कमी आ रही है। इस कारण कई गांवों की पेयजल योजनाएं ठप पड़ने की कगार पर पहुंच गई हैं। जलकल अभियंता पवन बिष्ट का कहना है कि गर्मी के कारण पेयजल स्रोतों में करीब 60 फीसदी तक गिरावट आ गई है।
लोहाघाट शहर के लिए रोजाना 1620 किलोलीटर पानी चाहिए, लेकिन इसके सापेक्ष महज 450 केएल पानी ही मिल पा रहा है। चौड़ी लिफ्ट योजना से 400 केएल, ऋषेश्वर नलकूप से 25 केएल, बंसवाड़, फोर्ती योजना से 10-10 केएल पानी मिल पा रहा है।
कई जगह वाहन से हो रही जलापूर्ति
गर्मी शुरू होते ही कई ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं का जल स्तर रसातल में पहुंच गया है। बनगांव, खूना, जाख चमोला, पुल्ला आदि क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है। जल संस्थान ने इन ग्रामीण क्षेत्रों में पिकअप वाहन के जरिए जलापूर्ति शुरू कर दी है।