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आग बुझाने को लोहाघाट से चंपावत की दौड़

Tue, 23 Feb 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
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वर्ष 1997 में सृजित जिला मुख्यालय चंपावत में फायर स्टेशन नहीं खुल सका है। जिस कारण कहीं भी आग लगने पर इसे बुझाने की जिम्मेदारी 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट के फायर स्टेशन की है। इससे जाहिर है अगर यहां कोई अग्निकांड हुआ, तो इससे बचाव को तात्कालिक तौर पर कोई बंदोबस्त नहीं है।
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आग बुझाने को फायरब्रिगेड का अकेला सहारा लोहाघाट है। सड़क चौड़ी होने के बावजूद यहां से चंपावत पहुंचने में करीब 30 मिनट का समय लगता है। चंपावत में फायर स्टेशन की सुविधा नहीं है। जिले में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के  लिए भले ही सरकारी कार्यालयों, भवनों में हाइड्रेंट हैं।

मगर निजी भवनों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों, धार्मिक स्थलों, बैंक आदि स्थानों में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय भगवान भरोसे हैं। पाटी, बाराकोट तहसील में भी आग से बचाव का अपना कोई इंतजाम नहीं है।
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पहाड़ के प्रमुख नगरों की लोहाघाट फायर स्टेशन से दूरी :
चंपावत : 15 किमी
बाराकोट : 23 किमी
पाटी : 30 किमी
देवीधुरा : 43 किमी
पंचेश्वर : 39 किमी

चंपावत से 75 किलोमीटर दूर जिले के मैदानी हिस्से टनकपुर में 2011 में फायर स्टेशन खुला। वहां की व्यवस्था एक स्थायी ड्राइवर समेत दो संविदा ड्राइवरों के हवाले हैं। सेकेंड अफसर सहित कई पद खाली हैं। यहां फायर स्टेशन का अपना भवन भी नहीं है।

 फायर सर्विस अधिकारी केएस बिष्ट का कहना है कि फायर स्टेशन के भवन के लिए भूमि नहीं मिल सकी है। जिस वजह से फायर स्टेशन नहीं बन पा रहा है। फायर कर्मियों के रहने का भी कोई इंतजाम नहीं है। यहां फायर कर्मी शारदा नदी के पास डेढ़ दशक पूर्व बने पूर्ति विभाग के गोदाम में रात काटने को मजबूर हैं।

जिले के पहाड़ी क्षेत्रों की आग को काबू करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण फायर स्टेशन लोहाघाट में है लेकिन 12 साल पहले स्थापित फायर स्टेशन आधा-अधूरा है। यहां एक ड्राइवर से काम चल रहा है। एफएसओ का पद खाली है। चार की बजाय एक लीडिंग फायरमैन से काम चल रहा है।

 फायरमैनों की कमी समेत बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। शिवालय स्थित नलकूप से पानी की सप्लाई होती है। भीषण गर्मी में कभी पानी की भी कमी हो जाती है। फायर स्टेशन में एक फोम टेंडर, एक वाटर टेंडर, एक मिनी वाटर टेंडर हाइप्रेशर समेत एक बैक पैक सैट बाइक है।

 फायर स्टेशन, फायर कर्मियों के भवनों के निर्माण के लिए 14 नाली 11 मुट्ठी जमीन तो मिली लेकिन भवन नहीं बन सका है। फायर कर्मी थाने की पुरानी बिल्डिंग में रहते हैं, जिसकी छत बरसात में टपकती है।

पुलिस अधीक्षक दिलीप सिंह कुंवर बताते हैं कि लोहाघाट, टनकपुर में आग से बचाव को पर्याप्त उपकरण है। कुछ स्टाफ अर्द्धकुंभ ड्यूटी में गया है। जिला मुख्यालय में फायर स्टेशन का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भेजा गया है।

 इस प्रस्ताव पर कार्यवाही चल रही है। जल्द ही हरी झंडी मिलने की संभावना है। जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पाटी में भी फायर स्टेशन की जरूरत है। भविष्य में इस प्रस्ताव को भी भेजा जाएगा।
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