लोहाघाट/पाटी (चंपावत)। दावाग्नि के चलते चीड़ के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। बृहस्पतिवार को चौकुड़ी के पास धधकी जंगल की आग ने यहां काफी बड़े क्षेत्र की हरियाली को लील लिया है। फायरब्रिगेड ने आग पर काबू पाने के लिए घंटों प्रयास किया। आग के कारण पुलहिंडोला-पंचेश्वर मार्ग पर अफरा-तफरी मच गई, जिसके चलते इस मार्ग पर लगभग तीन घंटे यातायात ठप रहा। इस मार्ग से रोज सैकड़ों बच्चे और शिक्षक विद्यालयों को जाते हैं। जंगलों में लगी आग फैलकर चौकड़ी में आ गई, तेज हवाओं के चलते आग और धुंध से लोगों का जीना मुश्किल बना था। आग की लपटें सड़क पर पहुंचने से यातायात ठप हो गया।
नरेश गिरि, रिचा राय, नरेश फर्त्याल, फरजाना सलीम, चंद्र किशोर पांडेय, रमेश देव, जनार्दन पांडेय, मुन्नी फर्त्याल आदि शिक्षकों ने आग बुझाने का प्रयास किया। वनकर्मी भी आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे थे। इधर बलांई, भुमलाई, बराकोट, रौंसाल, पंचेश्वर, सिंगदा, पाटी के गर्सलेख, किमाड़ीधार, तोली धार, पटनगांव, मूलाकोट, साल, टांण, रमक आदि स्थानों के जंगल भी धू-धूू कर जल रहे हैं। सड़क से जुडे़ जंगलों में आग लगने से ऊपर की ओर से पत्थर लुड़ककर आ रहे हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए काफी खतरा बना है। दिन में ही जंगली जानवर आबादी की ओर आ रहे हैं।
जंगलों को आग से बचाने में जहां वन विभाग पूरी तरह असफल रहा है, वहीं ग्रामीण भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता अंडोली गांव में लगी आग को गांव के ही लोगों ने रातभर मशक्कत कर काबू कर लिया है। जंगल की आग के कारण पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ अब व्यापक स्तर पर बीमारियां फैलने लगी हैं। वातावरण में फैली जबरदस्त धुंध के चलते जहां सांस की बीमारी, आंखों में जलन के अलावा शरीर का तापमान बढ़ने की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। वहीं इससे लोगों के जीवन को भी प्रभावित कर दिया है।