साधन सहकारी समितियों में सोमवार से ताले लटक गए। कैडर सचिवों के बाद अब आंकिक व अन्य कर्मचारियों ने भी आंदोलन की राह पकड़ी है। इससे जिले की सभी 23 समितियां फिलहाल बंद हो गई। समितियों के बंद होने से काश्तकारों के साथ ही सहकारिता विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
संगठन के अध्यक्ष लाल सिंह अधिकारी ने बताया कि सचिव का राजकीयकरण करने, ग्रेड पे 2800 करने, सातवें वेतनमान का लाभ देने और प्रभारी सचिवों को नियमित करने समेत तमाम मांगों को लेकर कैडर सचिव बीते 19 फरवरी से हड़ताल पर हैं। कैडर सचिवों के हड़ताल पर जाने से समितियों का कामकाज पहले ही प्रभावित हो रहा था। लेकिन अब आंकिक कर्मचारी संगठन के हड़ताल में कूदने से सहकारिता विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि सहकारिता विभाग कैडर सचिवों और आंकिकों की हड़ताल से होने वाले नुकसान की भरपाई की बात कर रहा है। लेकिन सोमवार को जिले की सभी 23 समितियों पर ताले लटके रहे। जिससे काश्तकारों को मुश्किलों को सामना करना पड़ा।
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कैडर सचिवों और आंकिकों की हड़ताल की भरपाई की जा रही है। सुपरवाइजर, राजकीय पर्यवेक्षक, सहायक विकास अधिकारी और अपर जिला सहायक अधिकारियों को समितियों का चार्ज लेने के निर्देश दे दिए गए हैं।
पीएस राणा, सहायक निबंधक, सहकारिता विभाग।
आंकिक संगठन ने भी किया देहरादून कूच
चंपावत। कैडर सचिवों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए सोमवार को जिले के आंकिक कर्मचारी संगठन के सदस्यों ने देहरादून कूच किया। देहरादून जाने वालों में संगठन अध्यक्ष हरीश मथेला, महामंत्री नीलकमल वर्मा, कृष्ण चंद्र भट्ट, नवीन चंद्र जोशी, तपन जोशी, दीपक बिष्ट, किशन सिंह बोहरा, ललित चौड़ाकोटी, एमडी जोशी, राम सिंह, लाल सिंह, हरीश जोशी, प्रकाश बिष्ट आदि शामिल थे।