लोहाघाट (चंपावत)। पहाड़ पर तेंदुओं का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कई आदमखोर ढेर किए जा चुके हैं। बावजूद इसके आए दिन लोगों के तेंदुओं का शिकार होने की घटनाएं घट रही हैं। शनिवार को नेपाल सीमा से लगे लोहाघाट ब्लॉक के डुंगराबोरा गांव में तेंदुए ने खेत में घास काटने गई एक युवती को अपना निवाला बना लिया। काफी ढूंढखोज के बाद युवती का अधखाया शव गांव से काफी दूर वन पंचायत के जंगल में मिला। इस घटना से डुंगराबोरा गांव समेत पूरे क्षेत्र में दहशत है। पोस्टमार्टम के बाद युवती का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
शुक्रवार शाम बसंती देवी (20) पुत्री गंगा सिंह बोहरा अपने खेत में घास काटने गई थी। शाम करीब पांच बजे घात लगाकर बैठे तेंदुए ने बसंती पर हमला कर दिया। तेंदुआ बसंती को घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया। देर शाम तक जब बसंती घर नहीं पहुंची तो परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी खोजबीन की। देर शाम करीब सात बजे वन पंचायत डुंगराबोरा के जंगल में बसंती का अधखाया शव पड़ा मिला। वन क्षेत्राधिकारी दीप जोशी ने बताया कि रात करीब 10 बजे ग्रामीणों ने घटना की जानकारी विभाग को दी। इसके बाद रौंसाल वन चौकी से वन दरोगा नंदाबल्लभ भट्ट और पंचेश्वर कोतवाली प्रभारी अनुराग सिंह के नेतृत्व में वन और पुलिस विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
शनिवार को लोहाघाट में शव का पोस्टमार्टम कराकर इसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि बसंती के परिजनों को तात्कालिक सहायता के लिए एक लाख रुपये का चेक दिया जा रहा है। शेष दो लाख रुपये अन्य कार्यवाही पूरी होने के बाद दिए जाएंगे।
मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा
लोहाघाट (चंपावत)। जिला पंचायत उपाध्यक्ष एलएम कुंवर ने विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, जिले के प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से पीड़ित परिवार को सहायता देने की मांग की। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में पिंजरा लगाने, आदमखोर तेंदुए को मारने के लिए शिकारी तैनात करने की मांग की। किसान कांग्रेस के कुमाऊं मंडल प्रवक्ता रमेश मेहता, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्कर बोहरा ने मुख्यमंत्री से पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया।
लोहाघाट रेंज में 10 लोग बन चुके हैं तेंदुए के शिकार
लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट रेंज में जंगली जानवरों की दहशत बनी रहती है। कभी तेंदुए, तो कभी जंगली सुअर और भालू ग्रामीणों पर हमला करते आ रहे हैं, जिसके चलते यहां के लोग अब जंगली जानवरों से अपने को सुरक्षित नहीं समझ रहे हैं। राज्य बनने के बाद से अब तक यहां तेंदुए 10 लोगों को निवाला बना चुके हैं।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि लोहाघाट रेंज अंतर्गत 2002-03 में तेंदुए ने एक महिला, 2003-04 में एक पुरुष, 2004-05 में तीन बच्चे, 2005-06 में एक महिला और चार बच्चों को निवाला बनाया था। इसके बाद इस तरह की यह पहली घटना है।
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2017 में चंपावत जिले में थे 76 तेंदुए
2017 की गणना के मुताबिक चंपावत वन प्रभाग में तब 76 तेंदुए थे। चूंकि 2017 के बाद तेंदुओं की गणना नहीं हुई है। ऐसे में इनका सही आकंड़ा उपलब्ध नहीं है। इन तीन सालों में इनकी संख्या निश्चित ही बढ़ गई होगी। वन विभाग का दावा है कि ज्यादातर तेंदुए जंगलों के भीतर ही विचरण कर रहे हैं। जंगलों में उन्हें आसानी से अपना नैसर्गिक और पसंदीदा आहार मिल जाता है। वनाधिकारी इसकी वजह तेंदुए के लिए जंगल में भरपूर आहार का होना बताते हैं। वन विभाग का कहना है कि डुुंगराबोरा क्षेत्र की घटना अपवाद है। अलबत्ता इसे लेकर विभाग पूरी नजर बनाए हुए हैं।
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ये सावधानी बरतें:
ग्रामीण अकेले घास लकड़ी के लिए जंगल न जाएं। महिलाएं घास आदि के लिए झुंड में ही जाएं।
रात के समय घरों से बाहर न जाएं। अगर जरूरत हो तो समूह में जाएं।
जंगल में बच्चों को न ले जाएं।