चंपावत। जिला मुख्यालय के निकटवर्ती ढकना बडोला ग्राम पंचायत की एक महिला को तेंदुए ने मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद से ग्रामीणों और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। सूचना पर पहुंची वन और राजस्व विभाग की टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
सोमवार सुबह करीब नौ बजे ग्राम ढकना बडोला की महिलाएं रोजाना की तरह एकहथिया नौले के समीप स्थित जंगल में जानवरों के लिए चारा पत्ती लाने गई थीं। दोपहर के वक्त एक तेंदुए ने ढकना निवासी मीना देवी (35) पत्नी रमेश सिंह नरियाल पर हमला कर दिया और उसे घसीटते हुए ले गया। महिलाओं की चीख पुकार सुन जंगल में अपनी भेड़ों के साथ रुका एक गडरिया और आसपास मौजूद अन्य लोग वहां पहुंचे। गडरिये के कुत्तों के भोंकने और लोगों के शोर मचाने पर तेंदुआ महिला को छोड़ भाग गया।
वन और राजस्व विभाग की टीम ने ढकना की सीमा पर वन पंचायत बलाई के झड़पतिया इलाके से महिला का क्षत विक्षत शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। घटना के बाद से महिलाएं और ग्रामीण दहशत में हैं। मृतका अपने पीछे पति और तीन बच्चों आयुष (15), लक्की (13) और रेशमा (11) को रोता बिलखता छोड़ गई है। ढकना के पूर्व प्रधान विनोद चौधरी, वन पंचायत सरपंच ईश्वरी देवी, पूर्व सरपंच विक्रम सिंह, भैरव सिंह आदि ने वन विभाग और प्रशासन से तेंदुए को जल्द से जल्द पकड़ने या फिर मारने की मांग की है। उन्होंने बताया कि तेंदुआ एक दो पहले भी लोगों पर हमला कर चुका है।
आपदा मोचक निधि से मिलेगा चार लाख का मुआवजा
चंपावत। डीएफओ रमेश चंद्र कांडपाल ने बताया कि तेंदुए के हमले में मारी गई महिला के परिजनों को आपदा मोचक निधि से चार लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। वन विभाग की ओर से मृतका के परिजनों को अहैतुक राशि के रूप में पचास हजार रुपये का भुगतान भी कर दिया है। संवाद
बमन्यूड़ा दियूरी में मवेशीखोर तेंदुए का आतंक
चंपावत। जिले के दूरस्थ क्षेत्र बमन्यूड़ा दियूरी में इन दिनों मवेशीखोर तेंदुए का आतंक बना हुआ है। अब तक यह तेंदुआ कई पालतू मवेशियों को मौत के घाट उतार चुका है। तेंदुए के खौफ के कारण ग्रामीणों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने की मांग उठाई है।
घास की गठ्ठर बांध रही मीना पर तेंदुए ने पीछे से बोला हमला
चंपावत। सोमवार का दिन ढकना बडोला गांव की मीना देवी के परिवार के लिए मनहूस साबित हो गया। मीना देवी गांव की अन्य महिलाओं के साथ रोज की तरह ही गांव के समीपवर्ती जंगल में अपने मवेशियों के लिए चारा पत्ती लेने गई थी। मौत की आहट से बेपरवाह मीना पर घात लगाए तेंदुए ने उस समय हमला कर दिया जब वह अपने द्वारा काटी गई घास का गठ्ठर बांध रही थी। तेंदुए ने उसकी गर्दन में दांत गड़ाने के साथ उसे घसीटते हुए घटनास्थल से 700 मीटर दूर तक ले गया। महिला का शव तलाशने में ग्रामीणों, वन और राजस्व विभाग की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। जंगल गई गांव की अन्य महिलाओं के अनुसार मीना देवी पर हमले से करीब दस मिनट पूर्व तेंदुए ने देवकी देवी और आनंदी देवी आदि पर भी हमला बोला था। इस दौरान आनंदी देवी ने देवकी पर हमला होता देख तेंदुए पर दराती से वार कर दिया, जिससे तेंदुआ उन्हें छोड़कर भाग गया था। मीना देवी के साथ जंगल गई निक्कू भंडारी, भागीरथी देवी, शकुंतला देवी, कमला देवी, लक्ष्मी देवी, महिमा आदि का कहना था हमलावर तेंदुआ सामान्य तेंदुए की तुलना में अधिक बड़ा था। उन्होंने तेंदुए के गुलदार होने का अंदेशा जताया है।
मासूम बच्चों के आर्तनाद से भीगीं सबकी आंखें
चंपावत। मृतका मीना देवी का शव घर पहुंचते ही उसके मासूम बच्चों के आर्तनाद से मौके पर मौजूद सभी लोगों की आंखें भर आईं। कक्षा नौ में पढ़ने वाले आयुष, कक्षा सात में पढ़ने वाले लक्की और कक्षा छह में पढ़ने वाली रेशमा के उदास चेहरे देखते हुए हर कोई भावुक हो गया।
2020 से अब तक की तेंदुए के हमले में हुईं मौतें
:- 22 अक्तूबर 2020: भिंगराड़ा रेंज के अंतर्गत नैनीताल जिले के कूकना गांव में चंपा परगाई।
:- 24 अक्तूबर 2020: देवीधुरा रेंज के अंतर्गत नैनीताल जिले के धैना गांव में खिमुली देवी।
:- छह नवंबर 2020: लोहाघाट रेंज के डुंगराबोरा गांव की बसंती देवी।
चंपावत जिले में हैं 76 तेंदुए
चंपावत। 2017 की गणना के मुताबिक चंपावत वन प्रभाग में कुल 76 तेंदुए हैं। वन विभाग का दावा है कि ज्यादातर तेंदुए जंगलों में ही विचरण कर रहे हैं। वहां उन्हें आसानी से अपना नैसर्गिक और पसंदीदा आहार मिल जाता है। वनाधिकारी इसकी वजह तेंदुए के लिए जंगल में भरपूर आहार का होना बताते हैं। अलबत्ता इसे लेकर विभाग पूरी नजर बनाए हुए हैं।
ये सावधानी बरतें
:- ग्रामीण अकेले घास या लकड़ी के लिए जंगल ना जाएं। महिलाएं घास आदि के लिए झुंड में ही जाएं।
:- रात के समय घरों से बाहर न जाएं, अगर जरूरत हो तो समूह में जाएं।
:- जंगल में बच्चों को बिल्कुल भी न ले जाएं।
नजदीक चार माह पूर्व चंपावत के दिखा था एक तेंदुआ
चंपावत। सोमवार को हुई घटना से करीब चार महीने पूर्व भी एक तेंदुआ शहर के बाहरी हिस्से में नजर आया था। गौड़ी के जंगल के पास मांदली में इस साल 28 जुलाई को एक तेंदुआ और उसके दो बच्चे दिखने से लोग सहमे थे। ये खोजे तो नहीं जा सके लेकिन वन विभाग ने से लोगों को सतर्क रहने के साथ ही बच्चे व बुजुर्गों को जरूरी होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी है।
वन विभाग की टीमें कर रही हैं प्रभावित क्षेत्र में गश्त
चंपावत। जिला मुख्यालय के ढकना बडोला क्षेत्र में नरभक्षी तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्र में गश्त कर रही हैं। प्रभागीय वनाधिकारी रमेश चंद्र कांडपाल ने बताया कि तेंदुए की गतिविधि पर नजर रखने के लिए कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों को अकेले में जंगल में प्रवेश नहीं करने की सलाह दी गई है।