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विधि संकाय की घोषणा हवा-हवाई

Thu, 11 Jan 2018 10:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे लोहाघाट (चंपावत)।
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लोहाघाट पीजी कॉलेज भवन। - फोटो : अमर उजाला
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 स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विधि संकाय खोलने की घोषणा हवा-हवाई रही। चार साल पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा की घोषणा में कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। कालेज में विधि संकाय न होने से छात्रों को कानून की पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। 
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अक्तूबर 2013 में लोहाघाट भ्रमण के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने छात्रों की मांग पर विधि संकाय खोलने की घोषणा की थी। इससे खासकर छात्र व युवाओं में कानून की पढ़ाई सुलभ होने की उम्मीद जगी थी। तब से अब तक चार साल का समय बीत गया है। लेकिन कालेज में अभी तक विधि संकाय का खुलना तो दूर शासन से कालेज प्रशासन को इस संबंध में एक पत्र तक नहीं आ पाया है।

छात्रों का कहना है कि विधि की पढ़ाई के प्रति खासी दिलचस्पी है। वकालत के पेशे के अलावा विधि से संबंधित सरकारी व निजी क्षेत्र में नौकरियों की भी काफी गुंजाइश रहती है। लेकिन यहां सबसे नजदीक में 123 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा में विधि संकाय है। जहां पढ़ने के लिए खर्च जुटा पाना हर किसी छात्र के सामर्थ्य में नहीं है।
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शिक्षकों के आठ पद रिक्त
लोहाघाट का डिग्री कालेज जिले का सबसे पुराना डिग्री कालेज है। यह 1979 में खुला है। पुराना होने के बाद भी इसकी हालत ठीक नहीं है। प्रवक्ताओं के काफी पद रिक्त हैं। शिक्षकों की कमी से छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर का रुख करना पड़ रहा है। 2100 की छात्र संख्या वाले कॉलेज में शिक्षकों के 33 पदों के सापेक्ष 18 स्थायी, साल अतिथि शिक्षक हैं। शिक्षकों के आठ पद रिक्त हैं।



जरूरत सात की, स्वीकृत मात्र एक पद 
कालेज में हिंदी, भूगोल, संस्कृत, राजनीतिक विज्ञान और वाणिज्य में शिक्षकों के सृजित पांच-पांच पदों के सापेक्ष दो से तीन-तीन ही शिक्षक हैं। जंतु विज्ञान, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान में प्रत्येक में शिक्षकों के एक-एक ही पद स्वीकृत हैं। जबकि मानकों के अनुसार इन विषयों में शिक्षकों के सात-सात  पद स्वीकृत होने चाहिए। कालेज प्रशासन के अनुसार गणित, मनोविज्ञान, समाज शास्त्र, इतिहास, शिक्षा शास्त्र, भौतिक विज्ञान, गणित आदि विषयों में शिक्षकों के तीन-तीन पद होने चाहिए, लेकिन एक-एक पद ही सृजित हैं।


कई विषयों की पढ़ाई के लिए बाहर जाना मजबूरी
लोहाघाट डिग्री कालेज में  पीजी स्तर पर हिंदी, संस्कृत, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, विज्ञान संकाय में जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान व रसायन विज्ञान की ही पढ़ाई हो पा रही है। भौतिकी, गणित समेत कई विषयों की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को  हल्द्वानी, नैनीताल, अल्मोड़ा या पिथौरागढ़ जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। विज्ञान भवन में पर्याप्त पानी नहीं है।



छात्र लगातार उठाते रहे आवाज
छात्रसंघ अध्यक्ष विवेक पुजारी, इंदर ढेक, दीपक फर्त्याल, गोविंद प्रसाद आदि का कहना है कि कॉलेज में शिक्षकों के पदों को भरने से लेकर पुस्तकालय, नए विषय व विधि संकाय को खोले जाने की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। इन मागों को लेकर हुए आंदोलन के चलते कुछ समस्याओं का समाधान भी हुआ है। पिछले साल सितंबर में गृह विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित में सहायक प्रोफेसर, प्रयोगशाला सहायक के पदों का सृजन हुआ है।

कोट
विधि संकाय को लेकर निदेशालय या शासन से कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए निदेशालय स्तर पर पत्र भेजे जाते रहे हैं। वहीं पीजी स्तर में गणित, गृह विज्ञान और भौतिक विज्ञान का पैनल हो गया है, अगले सत्र से इन विषयों के खुलने की उम्मीद है।
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डॉ. धर्मेंद्र कुमार तिवारी,
प्रभारी प्राचार्य, पीजी कॉलेज, लोहाघाट।
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