2016 का जनवरी बीत गई है। फरवरी ने दस्तक दे दी है, मगर इन 31 दिनों में एक मिलीमीटर भी बारिश नहीं हुई। 20 जनवरी को कुछ स्थानों में छिटपुट हिमपात हुआ, जबकि पिछले साल जनवरी में 92 मिलीमीटर बारिश हुई थी। वहीं, बारिश नहीं होने से खेत-खलिहान सूख गए हैं। मवेशियों के लिए हरी घास की समस्या भी पैदा हो रही है।
रविवार को आसमान पूरे दिन बादलों से घिरा जरूर रहा, लेकिन न सूर्यदेव दिखे और न बारिश हुई। न्यूनतम तापमान 8 डिग्री और अधिकतम 15 डिग्री सेल्सियस रहा। कड़ाके की ठंड हुई। लोग गरम कपड़े पहने रहे। ठंड से बचने को अलाव और अंगीठियों के ईद-गिर्द रहे। जिला उद्यान अधिकारी एचसी तिवारी का कहना है कि आलू की बुवाई में देरी हो रही है। गेहूं के जमने में भी देर हो रही है। पौध नहीं लग पा रही है। वहीं पेयजल स्रोतों पर भी इसका असर पड़ने लगा है।
किसानों ने की बैंक कर्ज माफ करने की मांग
देवीधुरा (चंपावत)। छह माह से वर्षा न होने के कारण सूखे का व्यापक असर होने लगा है। यहां किसानों ने राज्य सरकार से क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने के साथ उनके बैंक ऋण माफ करने एवं उन्हें निशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। कुंवर सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों का कहना था कि पहाड़ों पर खेती बारिश पर निर्भर रहती है। अगस्त से बारिश न होने के कारण अब पीने के पानी की समस्या पैदा होने लग गई है। खेती पर आधारित लोगों के सामने जबर्दस्त संकट आ गया है। इस दौरान त्रिलोक सिंह, दरबान सिंह, मान सिंह, प्रहलाद सिंह, भवान सिंह आदि थे।