लंबे समय से चंपावत जिले में सिडकुल की स्थापना से युवाओं को रोजगार का अवसर देने की मांग जल्द पूरी होने की उम्मीद है। प्रशासन ने बनबसा के जगबूड़ा के पास सिडकुल और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लैंड पोर्ट (भूमि बंदरगाह) के लिए वन भूमि की क्षति पूर्ति के लिए मंच, चूका, बकौड़ा आदि क्षेत्र में उपलब्ध 250 हेक्टेयर राजस्व भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भेज दिया है। इससे वन विभाग से लैंड पोर्ट और सिडकुल के लिए भूमि मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा में लंबे समय से सिडकुल की स्थापना की मांग उठ रही है। 18 जुलाई 2017 को तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कठुवापाती में सिडकुल स्थापना की घोषणा की थी थी। इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी विस चुनाव के दौरान क्षेत्र में सिडकुल खोलने की घोषणा कर चुके हैं। आठ माह पहले जगबूड़ा के पास 93 हेक्टेयर वन भूमि का प्रस्ताव वन विभाग को भेजा। सूत्रों के अनुसार इस बीच वन विभाग की ओर से क्षतिपूर्ति के विए भूमि प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख कम नजर आया। इस पर प्रशासन को नए सिरे से प्रस्ताव बनाना पड़ा। इसमें अब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 34 हेक्टेयर में लैंड पोर्ट बनाने का भी प्रस्ताव है। इसमें सीमा शुल्क स्टेशन, आव्रजन चेक पोस्ट बनेगा।
क्षतिपूर्ति के लिए 250 हेक्टेयर राजस्व भूमि का प्रस्ताव भेज दिया है। वन भूमि हस्तांतरण के होने के बाद ही आगे की कार्यवाही हो सकेगी। बहरहाल, दीपावली के बीच क्षतिपूर्ति के लिए राजस्व भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव भेज दिया है। इससे निकट भविष्य में दोनों के आकार लेने से विकास की उम्मीद जग गई है।
-आकाश जोशी, एसडीएम टनकपुर।
क्या है लैंड पोर्ट
लैंड पोर्ट यानि भूमि बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित एक ऐसा क्षेत्र है, इसमें हाईवे, स्टेट हाईवे और सड़कों, रेल मार्गों के हिस्से शामिल होते हैं। इसे सीमा शुल्क अधिनियम 1962 या विदेश अधिनियम 1946 के तहत भूमि सीमा शुल्क स्टेशन या आव्रजन जांच चौकी के रूप में अधिसूचित किया गया है। नेपाल सीमा पर रक्सौल और जोगबनी में भी बने हैं जो नेपाल के साथ भारत के व्यापार को संभालते हैं।