चंपावत। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम के लिए बनने वाले रज्जूमार्ग (रोपवे) के निर्माण कार्य शुरू होने में स्वतंत्र अभियंता का न मिलना भारी पड़ गया है। दिसंबर 2016 तक इसे पूर्ण होना था लेकिन इस पर अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। रोपवे बनाने में विशेषज्ञता रखने वाले ब्रिडकुल (ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) को स्वतंत्र अभियंता की व्यवस्था करनी थी, लेकिन अभी तक वह इसकी व्यवस्था नहीं कर पाया है। अब जिला प्रशासन ने दूसरे विभाग के जरिये स्वतंत्र अभियंता के लिए शासन को पत्र भेजा है।
पीपीपी मोड में 35 करोड़ रुपये की लागत से हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबे रोपवे के लिए प्रदेश सरकार ने केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के साथ एमओयू किया था। 15 जून 2015 को रोपवे का तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शिलान्यास भी कर लिया था। शिलान्यास के बाद वन अनापत्ति, बिजली संयोजन और कुछ छिटपुट काम हुए। सुरक्षा के मद्देनजर मृदा परीक्षण भारतीय एजेंसियों के अलावा आस्ट्रिया के विशेषज्ञों से भी कराया गया, लेकिन ब्रिडकुल की ओर से स्वतंत्र अभियंता उपलब्ध नहीं कराने के चलते रोपवे का काम आगे नहीं बढ़ पाया।
तीन बार निविदा निकाली, नहीं मिल पाया स्वतंत्र अभियंता: ब्रिडकुल
ब्रिडकुल के महाप्रबंधक (सिविल) आरपी उनियाल का कहना है कि रोपवे के स्वतंत्र अभियंता के लिए तीन बार निविदाएं निकाली गईं, लेकिन अभी तक स्वतंत्र अभियंता नहीं मिल सका है। इसके चलते स्वतंत्र अभियंता उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
रोपवे के लिए ब्रिडकुल को स्वतंत्र अभियंता उपलब्ध कराना था। एक साल तक स्वतंत्र अभियंता उपलब्ध नहीं करा पाने के चलते अब शासन को पत्र भेज लोक निर्माण विभाग या ग्रामीण निर्माण विभाग के माध्यम से स्वतंत्र अभियंता की व्यवस्था कराने का आग्रह किया गया है।- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम।
रज्जुमार्ग से होंगे कई लाभ
मां पूर्णागिरि धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भैरव मंदिर तक जीप और उसके बाद मां पूर्णागिरि मुख्य मंदिर तक तीन किमी पैदल जाना होता है। रोपवे बनने से श्रद्धालुओं को पैदल फासला तय नहीं करना होगा। मुख्य मंदिर तक तीन किमी पैदल चढ़ाई पार करने में सवा घंटे लगते हैं, जबकि रोपवे से यह दूरी 10 मिनट में तय हो जाएगी। इससे समय की बचत के साथ ही पहाड़ में चलने में असमर्थ बड़े-बुजुर्ग, बच्चों, बीमार और दिव्यांगों को भी मां के दर्शनों का लाभ मिल पाता।
रज्जुमार्ग परियोजना से संबंधित खास बिंदु
-चार ट्रॉलियों में एक घंटे में 800 यात्रियों की आवाजाही हो सकेगी।
-हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबे रोपवे का 10840 वर्ग मीटर का कॉरिडोर क्षेत्र है।
-ठुलीगाड़ में प्रशासनिक भवन, पार्किंग, कमरें आदि बनेंगे।
-लोअर टर्मिनल में रोपवे स्टेशन भवन, यात्री होल्डिंग एरिया, टिकट काउंटर, प्रशासनिक कार्यालय और सेवा एरिया, सार्वजनिक सहूलियत होंगी। मुख्य मंदिर के पास अपर टर्मिनल बनेगा।
-सुरक्षा के लिए आधुनिकतम तकनीक का उपयोग होगा।