चंपावत जिले के लोहाघाट में राखियां तैयार करती कुंजिका वर्मा।
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हाथों हाथ बिक रही हैं कुंजिका की बनाई राखियां
राखियों में लिखा सकते हैं नाम, ऐपण और पेटिंग्स भी ऑनलाइन बेचती हैं कुंजिका
गिरीश सिंह बिष्ट (संवाद)
चंपावत। लोहाघाट निवासी कुंजिका वर्मा कोरोना संक्रमण के काल में घर में बैठे-बैठे बेकार के सामान से खूबसूरत राखियां बना रही हैं। कुंजिका की बनाई राखियां फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से ऑनलाइन हाथों हाथ बिक रही हैं। कुंजिका की ओर से तैयार की गई विभिन्न प्रकार की राखियों की खासियत यह है कि इन्हें खरीदने वाला अपना नाम अथवा फोटो भी लगवा सकता है। कोई भी ऑनलाइन ग्राहक व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से फोटो भेज कर राखी में फोटो लगवा सकते हैं। कुंजिका की ओर से बनाई गई राखी 15 से 60 रुपये लागत की है। इसके अलावा कुंजिका चाबी के छल्ले, ऐपण और पेंटिंग्स बनाकर भी ऑनलाइन बेचती हैं। उनका फेसबुक पर कुंजिका आर्ट्स नाम से अपना वेब पेज है। जिससे वह अपने द्वारा बनाए गए पेंटिंग, राखी, ऐपण, कलश, चाबी के छल्ले, ड्रीमकैचर, विंड चाइम्स आदि का प्रचार-प्रसार करती हैं। कुंजिका ने अल्मोड़ा महाविद्यालय से कला विषय में एमए किया है। कोरोना महामारी के दौर में वह घर से ही स्वरोजगार कर रही हैं तथा दूसरों को भी प्रेरणा दे रही हैं।
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कुमाऊंनी कला ऐपण को भी दे रही बढ़ावा
चंपावत। कुंजिका वर्मा के हाथों में जादू है। बीते दिनों कला मंच बनबसा की ओर से आयोजित ऑनलाइन ऐपण प्रतियोगिता में उन्हें पहला स्थान मिला है। उनके बनाए गए ऐपण भी ऑनलाइन हाथों हाथ बिक जाते हैं।