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किमाड़ीधार में दो मंजिला पुराना मकान आग की भेंट चढ़ा

Mon, 02 May 2016 10:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
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आग से जला मकान - फोटो : अमर उजाला
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  दावाग्नि से यहां के हरे भरे जंगल लगातार झुलसते जा रहे हैं। जंगली आग के चलते मौसम में फैली धुंध से लोगों का जीना मुश्किल बना हुआ है। सोमवार को हालांकि आग लगने की घटनाओं में किसी प्रकार का इजाफा नहीं हुआ, लेकिन दिन भर धुंध और उमस के चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वन विभाग की  ओर से विभिन्न स्थानों में लगी आग पर काबू किए जाने का दावा किया गया है। लोहाघाट क्षेत्र के छिनकाछीना, रौलमेल, कूंण, पटनगांव, गर्सलेख, रैंगलबैंड में जंगलों आग लगी हुई है। 
किमाड़ीधार के जंगलों में लगी आग रविवार को गांव की ओर आ गई। जहां रेवाधर पचौली का पुराना दो मंजिला मकान आग की चपेट में आ गया। जिससे गृह स्वामी को काफी नुकसान हुआ है। आग से घर में रखे लकड़ी के दो पुराने संदूक के साथ इमारती लकड़ी भी जलकर राख हो गई है। पूर्व ब्लाक प्रमुख एलएस लमगड़िया ने विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करने के  बाद बताया कि आग से जंगलों को तो नुकसान हुआ ही है, ग्रामीण क्षेत्रों में  घास के लुट्टों के भी जलने से लोगों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने वन विभाग से पीड़ित लोगों को मुआवजा देने की मांग की है।
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इधर फर्नहिल के जंगल में लगी आग को नियंत्रित कर लिया गया है। अद्वैत आश्रम मायावती के जंगल को चारों ओर से फायर लाइन से घेर दिया गया है। जंगल की सुरक्षा के लिए यहां रात दिन निगरानी रखी जा रही है। जंगली आग के चलते मवेशियों के लिए चारे की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। वर्षा न होने के  कारण इस दफा हरी घास बहुत कम दिखाई दे रही थी, जो आग की भेंट चढ़ चुकी है। बाराकोट के तड़ाग गांव में जंगली आग से चार घास के लुट्टे जल चुके हैं।  सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा जोशी ने पठल्ती गांव में बिजली की चिंगारी से जले घास के लुट्टे के स्वामियों को मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है। 
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रीता ने शुरू किया जन जागरण अभियान
लोहाघाट(चंपावत)। धू धू कर जल रहे जंगलों को बचाने में जन जागरूकता पैदा करने के लिए तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त रीता गहतोड़ी ने जन जागरण अभियान शुरू कर दिया है। रीता का कहना है कि जंगल महिलाओं के मायके रहे हैं। जंगलों के कारण ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। साथ ही जो भी पानी मिल रहा है। जंगलों की बदौलत मिल रहा है। यदि लोगों ने अपने अपने जंगलों को आग की भेंट चढ़ने से नहीं बचाया तो इसे बचाने के लिए दूसरे लोग नहीं आएंगे। उन्होंने वन विभाग से ग्रामीण क्षेत्रों में जल रहे जंगलों को बचाने के लिए सहयोग तथा समन्वय का कार्यक्रम स्थापित करने पर जोर दिया है।
 
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