टनकपुर में शारदा नदी से खनन की तैयारियों का जायजा लेते वन निगम के जीएम डॉ. विवेक पांडेय और अन्य अफस
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टनकपुर (चंपावत)। शारदा में धरातल पर खनन निकासी शुरू होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है क्योंकि खनन व्यवसायियों ने रॉयल्टी दरों में एकरूपता न होने के कारण वन निगम के कुमाऊं महाप्रबंधक डॉ. विवेक पांडेय के खनन कार्य शुरू करने के अनुरोध को ठुकरा दिया है। दौरे पर पहुंचे डॉ. विवेक पांडेय ने खनन गेट, तौल कांटे सहित खनन क्षेत्र का मुआयना किया। उन्होंने अधिकारियों को शारदा नदी से खनन निकासी शुरू करने के लिए सभी तैयारियां पुख्ता करने के निर्देश दिए।
खनन व्यवसायियों ने कुमाऊं महाप्रबंधक से कहा कि चल्थी और चूका से आरबीएम की दर टनकपुर की अपेक्षा महज 25 प्रतिशत है। शारदा से निकासी की रॉयल्टी 27 रुपये है जबकि पट्टे वाले क्षेत्रों में रॉयल्टी सिर्फ पांच से सात रुपये है। ऐसे में शारदा से खनन निकासी में व्यवसायियों को घाटा उठाना पड़ रहा है। रॉयल्टी की एकरूपता के बगैर खनन निकासी शुरू करना संभव नहीं है। विरोध जताने वालों में शक्तिमान यूनियन अध्यक्ष मनोज गुप्ता, दीपक जोशी, पिंकी शर्मा, चंद्रमोहन सिंह, चंद्रमोहन कलौनी आदि रहे।
निरीक्षण के दौरान निगम के आरएम महेश आर्य, डीएलएम बीएल आर्या, डीएसएम राकेश कुमार, डीएलएम (खनन) देवेंद्र सिंह, अनुभाग अधिकारी लक्ष्मण बोहरा के अलावा खनन व्यवसायी, वाहन स्वामी और स्टोन क्रशर स्वामी मौजूद रहे।
पिछले साल सवा दो लाख घनमीटर हुई थी निकासी
टनकपुर (चंपावत)। शारदा नदी से पिछले साल खनन निकासी 15 दिसंबर से शुरू होकर 28 मई तक चली थी। इस अवधि में 2.65 लाख घनमीटर लक्ष्य के सापेक्ष 2.25 लाख घनमीटर खनन सामग्री की निकासी हुई। इससे सरकार को 9.86 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। शारदा से खनन करने की भारत सरकार की अनुमति फरवरी 2023 में पूरी हो रही है। नवीनीकरण के लिए प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया है।