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जोगा राम को मिला शिल्परत्न सम्मान

Sat, 30 Jan 2016 10:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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काली कुमाऊं की मशहूर लोहे की कढ़ाई को राज्य स्तर पर मान्यता मिली है। उद्योग विभाग के सौजन्य से काकड़ नर्रा के 65 वर्ष से लोहे की कढ़ाई और अन्य औजार बनाते आ रहे 80 वर्षीय जोगा राम को शिल्परत्न के रूप में चुना गया था। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 27 जनवरी को आयोजित समारोह में इन्हें शिल्परत्न पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये का चेक, स्मृति चिन्ह देने के साथ उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान जोगा राम ने अपने हाथ से बनाई लोहे की कढ़ाई मुख्यमंत्री को भेंट की। सीएम ने कहा कि इस भज्याली में अब डुबके, जौला, गौतानी, चुड़कानी बनाकर खाई जाएगी।
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शिल्परत्न के अनुसार उन्होंने 13 वर्ष की आयु से यह काम शुरू कर दिया था। तीसरी कक्षा में जाने पर कापी किताबों के लिए दो रुपये भी न होने पर उनके पिता गोपाल राम ने उन्हें अपने इस पुश्तैनी पेशे से जोड़ दिया। जोगा राम ने अपनी मेहनत के बल पर लोहे का कुटीर उद्योग शुरू किया, जिसमें वह लोहे की कढ़ाइयों के अलावा कृषि यंत्र, दरांती, कुल्हाड़ी, नेपाली खुखरी आदि बनाते हैं। इस कार्य में इनके पुत्र कुंवर लाल सहयोग करते आ रहे हैं। इस उम्र में भी उन्हें अपने पुश्तैनी पेशे के प्रति बड़ा जुनून है। इनके हाथ की बनाई कढ़ाइयों की अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, जौलजीवी आदि स्थानों में व्यापक मांग रहती है। यहां की कढ़ाइयों की यह खूबी है कि लोहे को गर्म कर उसे हथौड़े से पीट-पीट कर उसकी सारी गंदगी निकाल दी जाती है। बाद में उसे कढ़ाई का रूप देने पर जब राख से मला जाता है तो उसमें सफेदी आ जाती है।

वर्क शेड और वेल्डिंग मशीन की है आवश्यकता
जोगा राम का कहना है कि उन्हें वर्क शेड और वेल्डिंग मशीन की आवश्यकता है। वह इसके लिए उद्योग विभाग से लगातार अनुरोध करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि वर्क शेड न होने से उन्हें बरसाती मौसम में काम बंद करना पड़ता है, यदि वर्क शेड मिलता है तो वह कम से कम 10 लोगों को रोजगार देने में सक्षम हैं।
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