जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित पूर्णानंद जोशी ने भले ही जंग-ए-आजादी में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया हो, लेकिन आजादी के 72 साल बाद सेनानी के नाम को समुचित सम्मान नहीं मिल पाया है। इसका जीता जागता उदाहरण टनकपुर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान है, जिसका नामकरण सेनानी के नाम पर करने की औपचारिकता एक साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है।
प्रदेश सरकार ने चार साल पूर्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर स्कूल, अस्पताल आदि के नाम रखने का आदेश जारी किया था। अनु सचिव पूरन गिरि ने मई 2018 को तकनीकी शिक्षा विभाग को सेनानी के नामकरण पर टनकपुर आईटीआई रखने के लिए कार्यवाही के निर्देश दिए थे। इस पर प्रशिक्षण उप निदेशक ने टनकपुर आईटीआई से औचित्यपूर्ण प्रस्ताव भेजने को कहा, लेकिन अब तक आईटीआई का नाम पंडित पूर्णानंद जोशी नहीं हो पाया।
सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के जिलाध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी ने आरोप लगाया कि शासन के स्तर पर सेनानियों को न तो सम्मान मिल रहा है और नहीं जीओ का पालन हो रहा है। सूखीढांग जीआईसी का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी के नाम पर रखा गया।
जंग-ए-आजादी में जेल और जुर्माना
चंपावत। मामूली किसान परिवार में जन्मे पूर्णानंद जोशी ने स्वाधीनता आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। इसकी उन्हें कीमत भी चुकानी पड़ी। शारीरिक यातनाओं के अलावा उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन पर अर्थदंड भी लगाया गया।
टनकपुर आईटीआई का नाम सेनानी पूर्णानंद जोशी के नाम पर रखने के लिए प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलते ही संस्थान का नाम सेनानी के नाम पर कर दिया जाएगा।
आरएस मर्तोलिया, प्राचार्य, आईटीआई, टनकपुर।
विधायक के पत्र पर भी नहीं हुई कार्यवाही
चंपावत। सेनानी के नाम पर आईटीआई का नामकरण करने के विधायक के पत्र पर भी कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने पिछले साल 11 अक्तूबर को प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय के निदेशक (प्रशिक्षण) को पत्र भेज आईटीआई का नाम सेनानी स्वर्गीय पूर्णानंद जोशी के नाम पर रखने की संस्तुति की थी।