लीड बैंक कार्यालय में बृहस्पतिवार को ताले लटके थे। यह स्थिति अधिकारी के छुट्टी में होने या नदारद रहने की वजह से नहीं बनी है, बल्कि अधिकारी और कर्मियों की कमी के चलते बनी हैं। कमोबेश हर माह पांच दिन इस तरह नौबत आती है।
चंपावत जिले में कुल 58 बैंक हैं। इन बैंकों की प्रगति, ऋण-जमा अनुपात की कार्ययोजना से लेकर बैंक और प्रशासन के बीच समन्वय की भूमिका लीड बैंक कार्यालय अदा करता है। जिले में पर्यटन, उद्योग, कृषि सहित विभिन्न योजनाओं के ऋण, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, पीएम मुद्रा योजना सहित सरकार द्वारा पोषित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर निगरानी रखने का जिम्मा लीड बैंक का है, लेकिन जिले के इस लीड बैंक की अपनी हालत ठीक नहीं है।
बैंक में लीड बैंक प्रबंधक (एलबीएम) के अलावा कोई कर्मचारी नहीं है। प्रबंधक को ही कंप्यूटर में डाटा फीड करने से लेकर फील्ड का कार्य करना पड़ता है। लीड बैंक प्रबंधक के राज्य स्तरीय समीक्षा समिति की बैठक या विभागीय कामकाज से बाहर जाने पर बैंक पर ताला लगाना मजबूरी है और बृहस्पतिवार को भी ऐसा ही नजर आया। बैंक में स्टाफ की कमी के अलावा अपना भवन भी नहीं है। वर्तमान में यह किराए के महज दो कमरों में किसी तरह चल रहा है।
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लीड बैंक कार्यालय में पदों का भारी टोटा है। लिपिकीय कार्य करने से लेकर कार्यालय को खोलने-बंद करने वाला भी कोई नहीं है। कार्मिकों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। किसी दूसरे अधिकारी-कर्मी के नहीं होने से विभागीय बैठकों में जाने पर कई बार कार्यालय बंद करने जाने की मजबूरी होती है। -आनंद सिंह रावत, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।